आगरा।
विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट माननीय शिव कुमार ने दलित उत्पीड़न के एक मामले में विवेचना में लापरवाही बरतने पर कड़ा रुख अपनाया है।
न्यायालय ने पुलिस आयुक्त को आदेश दिया है कि इस मुकदमे की अग्रिम विवेचना किसी अन्य सक्षम विवेचक से 30 दिन के भीतर कराकर आख्या प्रस्तुत की जाए।
साथ ही, अदालत ने वर्तमान विवेचक के विरुद्ध सख्त निर्देश देते हुए कहा कि उन्हें भविष्य में किसी भी मुकदमे की विवेचना न सौंपी जाए।
प्रकरण के अनुसार, नाला काजीपाड़ा निवासी राहुल कुमार पिप्पल ने 4 नवंबर 2025 को 9 आरोपियों के विरुद्ध तहरीर दी थी। वादी का आरोप था कि वह शिवाजी मार्केट स्थित अपनी दुकान पर बैठा था, तभी विपक्षियों ने पुरानी रंजिश के चलते लाठी-डंडों और सरियों से उस पर हमला कर दिया।
इस दौरान बीच-बचाव करने आए वादी के माता-पिता के साथ भी मारपीट की गई, जिससे उसके पिता के सिर में गंभीर चोट आई।
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वादी ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर आरोप लगाया कि विवेचक ने अभियुक्तों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नजरअंदाज किया।
वादी के अनुसार, उसके पिता के सिर का सीटी स्कैन कराया गया था जिसमें फ्रैक्चर की पुष्टि हुई थी, लेकिन विवेचक ने न तो उस रिपोर्ट को विवेचना का हिस्सा बनाया और न ही संबंधित डॉक्टर के बयान दर्ज किए।
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इसके अतिरिक्त, गंभीर चोट होने के बावजूद मुकदमे में उचित धाराओं की बढ़ोतरी नहीं की गई। वादी ने न्यायहित में धारा 110 बीएनएस बढ़ाने का भी आग्रह किया था।
न्यायालय ने मेडिकल रिपोर्ट और मामले के तथ्यों का अवलोकन करने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त की।
विशेष न्यायाधीश ने पुलिस आयुक्त को निर्देशित किया कि मामले की पारदर्शी जांच के लिए विवेचक बदला जाए और एक महीने के भीतर अग्रिम विवेचना पूरी की जाए।
अदालत के इस आदेश से विवेचना के नाम पर खानापूर्ति करने वाले अधिकारियों के बीच हड़कंप की स्थिति है।
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