आगरा।
जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली और अदालती आदेशों की अवहेलना पर न्यायालय ने बेहद सख्त रुख अपनाया है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (संख्या-13) माननीय महेश चंद वर्मा की अदालत ने एक हत्या के पुराने मामले में गवाही देने के लिए उपस्थित न होने पर तत्कालीन क्षेत्राधिकारी जेएन अस्थाना के विरुद्ध गैर जमानतीय वारंट और फरारी की उद्घोषणा जारी करने के साथ ही उनका वेतन रोकने के आदेश दिए हैं।
यह मामला वर्ष 2014 का है, जिसमें थाना सदर में ओमप्रकाश एवं अन्य के विरुद्ध हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था।
वर्तमान में सिकंदरा राऊ, जनपद हाथरस में क्षेत्राधिकारी के पद पर तैनात जेएन अस्थाना इस मामले में महत्वपूर्ण गवाह हैं।
चूंकि यह मुकदमा प्राचीनतम वादों की श्रेणी में आता है, इसलिए उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार इसका शीघ्र निस्तारण किया जाना अनिवार्य है।
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अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि पूर्व में कई बार प्रतिकूल आदेश पारित किए जाने के बावजूद तत्कालीन क्षेत्राधिकारी गवाही के लिए न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए।
अधिकारी की इस अनुपस्थिति को न्याय प्रक्रिया में बाधा मानते हुए न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक हाथरस को निर्देशित किया है कि जेएन अस्थाना का वेतन अग्रिम आदेशों तक रोक दिया जाए।
न्यायालय द्वारा उठाए गए इस कदम से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया है कि गवाहों, विशेषकर पुलिस अधिकारियों द्वारा समय पर गवाही न देने से गंभीर आपराधिक मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी होती है।
अब इस मामले में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए हाथरस पुलिस प्रशासन को आदेश की प्रति भेज दी गई है।
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