आगरा:
जनपद की साइबर क्राइम थाना पुलिस द्वारा ठगी के मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी देवेश यादव को न्यायालय से बड़ा झटका लगा है।
एडीजे (प्रथम) माननीय पुष्कर उपाध्याय की अदालत ने मामले की गंभीरता और अभियोजन के तर्कों को स्वीकार करते हुए आरोपी की जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि:
वादी राजेंद्र प्रसाद शर्मा, जिनका दयाल बाग स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में खाता है, साइबर ठगी का शिकार हुए थे।
6 अगस्त 2025 को साइबर अपराधियों ने उनके खाते से 14 लाख 99 हजार रुपये की बड़ी धनराशि पार कर दी थी। इस संबंध में थाना साइबर क्राइम में मुकदमा दर्ज कराया गया था।
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पुलिस कार्रवाई और बरामदगी:
विवेचना के दौरान पुलिस ने मध्य प्रदेश के सागर जिले (सदर) के निवासी देवेश यादव पुत्र महेंद्र यादव और उसके अन्य साथियों को गिरफ्तार किया था।
जांच में सामने आया कि ठगी की रकम का एक हिस्सा आरोपी के खाते में ट्रांसफर किया गया था।
* बरामदगी: पुलिस ने आरोपी देवेश यादव के कोटक महिंद्रा बैंक के खाते से 1 लाख रुपये बरामद किए थे।
न्यायालय का फैसला:
सुनवाई के दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (ADGC) आदर्श चौधरी ने आरोपी की जमानत का कड़ा विरोध किया।
उन्होंने तर्क दिया कि साइबर अपराध समाज के लिए एक गंभीर खतरा बन चुका है और आरोपी के विरुद्ध पुख्ता साक्ष्य मौजूद हैं।
“मामले की गंभीरता और वादी की बड़ी धनराशि की ठगी को देखते हुए, आरोपी को जमानत का लाभ दिया जाना न्यायोचित नहीं है।” – न्यायालय, एडीजे 1
इन्हीं तर्कों से सहमत होते हुए न्यायाधीश माननीय पुष्कर उपाध्याय ने आरोपी देवेश यादव की जमानत याचिका को निरस्त करने के आदेश जारी किए।
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