आगरा।
दहेज उत्पीड़न और विवाहिता को आत्महत्या के लिए विवश करने के एक गंभीर मामले में न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में बड़ा निर्णय सुनाया है।
अपर जिला जज (एडीजे -19) माननीय लोकेश कुमार ने आरोपी पति अयाज उर्फ गुड्डू और सास श्रीमती जुबेदा को सभी आरोपों से दोषमुक्त करते हुए बरी करने के आदेश दिए हैं।
मामले का संक्षिप्त विवरण:
घटना थाना सदर क्षेत्र के शहीद नगर की है। वादी शाहिद हुसैन ने आरोप लगाया था कि उसकी बुआ रशीदा उर्फ गुड्डी का निकाह 20 जून 2009 को अयाज के साथ हुआ था। निकाह के समय कार, 50 तोला सोना और अन्य कीमती सामान देने के बावजूद ससुराल पक्ष संतुष्ट नहीं था।
आरोप था कि दो बच्चे होने के बाद भी अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर रशीदा को प्रताड़ित किया जाता रहा, जिससे तंग आकर 14 मार्च 2017 को उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
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न्यायालय में सुनवाई और गवाही:
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से वादी समेत कुल सात गवाह न्यायालय में पेश किए गए। हालांकि, सुनवाई के दौरान मामले में मोड़ तब आया जब:
गवाह मुकरे: पेश किए गए गवाहों ने अदालत के समक्ष अपने पूर्व में दिए गए कथनों का समर्थन नहीं किया।
साक्ष्यों की कमी: बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक कुमार शर्मा ने तर्क दिया कि आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं है और गवाहों के बयानों में विरोधाभास है।
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अदालत का निर्णय:
पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन और वरिष्ठ अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए, एडीजे-19 माननीय लोकेश कुमार ने माना कि आरोपियों के विरुद्ध दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।
इसी आधार पर न्यायालय ने पति अयाज उर्फ गुड्डू और सास श्रीमती जुबेदा को रिहा करने के आदेश जारी किए ।
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