आगरा।
आगरा की एक अदालत ने ट्रक बेचने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने के मामले को गंभीरता से लिया है।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-10 माननीय मो. साजिद ने फर्जी कागजात तैयार कर 17 लाख 50 हजार रुपये हड़पने के आरोपियों के विरुद्ध थानाध्यक्ष अछनेरा को मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है।
यह आदेश अदालत ने पीड़ित प्रवीन कुमार द्वारा अपने अधिवक्ता केशव चतुर्वेदी के माध्यम से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद दिया।
क्या है ठगी का पूरा मामला ?
शिकायत के अनुसार, वादी प्रवीन कुमार और आरोपी पक्ष (मान सिंह व उसके दो पुत्र सचिन एवं रोहन सिंह) दोनों आगरा के ग्राम नागर के निवासी हैं और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े हैं।
* सौदा: आरोपियों ने ट्रक संख्या RJ 34 GA 2426 को 21 लाख 50 हजार रुपये में बेचने का सौदा वादी से किया।
* एडवांस पेमेंट: आरोपियों ने वादी से 17 लाख 50 हजार रुपये एडवांस के तौर पर ले लिए और ट्रक के कागजातों की फोटोकॉपी थमा दी। तय हुआ था कि नाम ट्रांसफर होने पर शेष 4 लाख रुपये देकर मूल कागजात ले लिए जाएंगे।
जांच में खुला ‘फर्जीवाड़े’ का खेल:
धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब वादी ट्रक ट्रांसफर कराने के लिए आर.टी.ओ. (RTO) कार्यालय पहुँचा:
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* फर्जी रजिस्ट्रेशन: आर.टी.ओ. कार्यालय में जांच करने पर पता चला कि उक्त नंबर का कोई ट्रक वहां पंजीकृत (Registered) ही नहीं है।
* अस्तित्वहीन इंजन/चैसिस: सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि ट्रक के कागजातों पर जो इंजन और चैसिस नंबर दर्ज थे, उस नंबर का ट्रक संबंधित कंपनी ने कभी बनाया ही नहीं था।
धमकी देकर पैसे लौटाने से इंकार:
जब वादी ने अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपियों ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी देते हुए पैसे लौटाने से साफ मना कर दिया।
अदालत का आदेश:
वादी के अधिवक्ता के तर्कों और प्रस्तुत साक्ष्यों को प्राथमिक रूप से सही पाते हुए कोर्ट ने अछनेरा पुलिस को आदेश दिया कि मान सिंह, सचिन और रोहन सिंह के खिलाफ सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की गहनता से जांच की जाए।
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