आगरा।
ताजमहल (तेजोमहालय) में जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और हिंदू त्योहारों पर पूजा-अर्चना की मांग को लेकर चल रहे विवाद में शुक्रवार को आगरा के लघुवाद न्यायालय में अहम सुनवाई हुई।
मामले में मुस्लिम पक्ष (सैयद इब्राहिम हुसैन जैदी) द्वारा पक्षकार बनने के लिए दी गई अर्जी पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई।
न्यायालय में क्या हुआ ?
सुनवाई के दौरान वादी कुंवर अजय तोमर के अधिवक्ता शिव आधार सिंह तोमर ने कांग्रेस नेता सैयद इब्राहिम हुसैन जैदी की पक्षकार बनने वाली अर्जी का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि जैदी के पास पक्षकार बनने का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है।
दूसरी ओर, इब्राहिम हुसैन जैदी के अधिवक्ता रईस उद्दीन ने अपना पक्ष रखने के लिए न्यायालय से अतिरिक्त समय की मांग की और वादी द्वारा दाखिल आपत्ति की नकल पुनः मुहैया कराने का अनुरोध किया।
हालांकि, वादी पक्ष ने कहा कि नकल पहले ही दी जा चुकी है, लेकिन न्यायाधीश ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए वादी को पुनः नकल देने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई के लिए 23 फरवरी 2026 की तिथि नियत की।
पक्षकार बनने पर क्यों है आपत्ति ?
वादी पक्ष का कहना है कि ताजमहल इब्राहिम हुसैन जैदी की कोई निजी संपत्ति नहीं है।वे शाहजहाँ या मुमताज के वंशज भी नहीं हैं, इसलिए उन्हें इस केस में पक्षकार नहीं बनाया जाना चाहिए।
पूर्व की सुनवाई में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी जैदी की अर्जी पर आपत्ति जताई थी। एएसआई के अधिवक्ता के अनुसार, ताजमहल से जुड़ी कानूनी लड़ाई लड़ना और जानकारी देना केवल विभाग की जिम्मेदारी है, किसी निजी व्यक्ति का इसमें कोई अधिकार नहीं है।
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क्या है पूरा विवाद ?
योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर अजय तोमर ने 23 जुलाई 2024 को यह वाद दायर किया था। उनके दावे के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
ऐतिहासिक दावा:
ताजमहल मूल रूप से ‘तेजोमहालय’ शिव मंदिर है, जिसे राजा परमार्दिदेव ने 1155 से 1212 के मध्य बनवाया था।
कब्जे का आरोप:
बाद में यह राजा मानसिंह और राजा जयसिंह का महल रहा, जिसे शाहजहाँ ने धोखे से हड़प लिया और इसे मकबरे की झूठी कहानी गढ़ी।
मांग:
करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र होने के नाते यहाँ जलाभिषेक और पूजा-अर्चना की अनुमति दी जाए।
वादी का बयान:
कुंवर अजय तोमर ने मीडिया से बात करते हुए कहा,
“विपक्षी पक्ष न्यायालय का समय व्यर्थ कर रहे हैं। उनके पास कोई ठोस सबूत नहीं है, इसलिए वे बार-बार नकल मांगने और समय बढ़ाने का बहाना बना रहे हैं। हमने उन्हें पुनः नकल उपलब्ध करा दी है और अगली सुनवाई पर हम अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे।”
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