आगरा:
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (प्रथम), आगरा ने चिकित्सीय लापरवाही से जुड़े एक पुराने मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।
आयोग ने निर्देश दिया है कि निर्णीत ऋणी (विपक्षी) द्वारा जमा की गई 1,75,739/- रुपये (एक लाख पचहत्तर हजार सात सौ उनतालीस रुपये) की डिक्रीटल धनराशि का भुगतान परिवादी बी. एन. पचौरी को जल्द से जल्द अकाउंट पेयी चेक के माध्यम से किया जाए।
क्या था पूरा मामला ?
यह मामला साल 2012-13 से जुड़ा है, जब परिवादी बी. एन. पचौरी की पत्नी श्रीमती सुधा पचौरी (जो सेंट जॉर्ज कॉलेज में शिक्षिका थीं) को पीठ और कमर में दर्द की शिकायत हुई। परिवादी का आरोप था कि विपक्षी डॉक्टरों ने उनकी पत्नी की बीमारी का सही समय पर डायग्नोसिस (निदान) नहीं किया।
अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में लक्षण दिखने के बावजूद उन्हें केवल दर्द निवारक दवाएं दी जाती रहीं। जब जनवरी 2014 में सी.टी. स्कैन कराया गया, तब पता चला कि उन्हें पैन्क्रियाज (अग्नाशय) का कैंसर है जो काफी बढ़ चुका था।
एम्स दिल्ली और टाटा मेमोरियल मुंबई में इलाज के बावजूद 17 दिसंबर 2014 को उनकी मृत्यु हो गई। परिवादी ने आरोप लगाया कि यदि एक साल पहले सही इलाज मिल जाता तो उनकी पत्नी की जान बचाई जा सकती थी।
आयोग की सुनवाई और निर्णय:
आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई की। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि:
* डॉ. दिनेश गर्ग (विपक्षी संख्या 02) के पास परिवादी की पत्नी का इलाज 12 अक्टूबर 2013 से 11 जनवरी 2014 तक चला था, जिसकी पुष्टि स्वयं विपक्षी ने भी की।
* आयोग ने साक्ष्यों के आधार पर परिवादी को डॉ. दिनेश गर्ग का ‘उपभोक्ता’ माना।
* लंबे समय तक चले इस कानूनी विवाद के बाद, आयोग ने क्षतिपूर्ति का आदेश दिया था।

ताजा आदेश:
ताजा आदेश (दिनांक 12.01.2026) के अनुसार, विपक्षी द्वारा डिक्रीटल धनराशि आयोग के खाते में जमा कराई जा चुकी है।
आयोग ने परिवादी के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए इस राशि के तत्काल भुगतान का आदेश दिया है और प्रकीर्ण वाद की कार्यवाही को समाप्त कर दिया है।
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