आगरा:
पुलिस द्वारा शातिर मोबाइल लुटेरों को पकड़ने का दावा और उनके ‘गुडवर्क’ की पोल खुल गई जब एक सत्र अदालत ने चार आरोपियों को जमानत दे दी।
पुलिस ने इन आरोपियों के पास से 13 मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिलें बरामद करने का दावा किया था, लेकिन वे इन्हें किसी भी अपराध से जोड़ने में नाकाम रहे।
क्या है मामला ?
थाना शाहगंज में 23 अगस्त 2025 को उप-निरीक्षक जितेंद्र कुमार ने मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि नालंदा सिटी कॉलोनी के पास से शानू, सोनू, उदय (निवासीगण नरीपुरा) और रशीद (निवासी किशोरपुरा, मथुरा) को हिरासत में लिया गया था।

पुलिस ने दावा किया था कि इन आरोपियों ने विभिन्न स्थानों से 13 मोबाइल फोन लूटे थे और उनके पास से चाकू और मोटरसाइकिल भी बरामद की गई थी। इस गिरफ्तारी को पुलिस ने एक बड़ी सफलता के रूप में पेश किया था।
पुलिस की खामियां बनी रिहाई की वजह:
अदालत में पुलिस इस मामले को साबित करने में विफल रही। आरोपियो के वकील नरेंद्र कुमार बघेल ने अदालत में तर्क दिया कि पुलिस बरामदगी के लिए कोई भी स्वतंत्र गवाह पेश नहीं कर सकी और न ही बरामद किए गए मोबाइलों को किसी भी विशिष्ट अपराध से जोड़ पाई।
अदालत ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए सभी चार आरोपियों को जमानत दे दी और उनकी रिहाई के आदेश जारी किए।
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