आगरा /बेंगलुरु 15 नवंबर ।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार (14 नवंबर) को कहा कि वह अगले शनिवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अपील पर सुनवाई करेगा, जिसमें एकल न्यायाधीश पीठ के आदेश को चुनौती दी गई, जिसने कथित मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (मूडा ) घोटाले में उनके खिलाफ जांच के लिए मंजूरी/अनुमोदन देने के राज्यपाल के फैसले को बरकरार रखा।
चीफ जस्टिस एन वी अंजारिया और जस्टिस के वी अरविंद की खंडपीठ ने सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी की सुनवाई के बाद, जिन्होंने मामले को तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किया।
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उन्होंने कहा कि वह कार्यालय आपत्तियों को दूर करने के अधीन 23 नवंबर को अपील पर सुनवाई करेगी। अपील अंतरिम राहत के माध्यम से आदेश के संचालन पर रोक लगाने की मांग करती है।
इससे पहले जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश पीठ ने सिद्धारमैया द्वारा दायर याचिका खारिज की थी और कहा था कि शिकायतकर्ताओं को शिकायत दर्ज करने या राज्यपाल से मंजूरी लेने का अधिकार था।
इसके अलावा, न्यायालय ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17 ए के तहत मंजूरी लेना शिकायतकर्ता का कर्तव्य है। राज्यपाल स्वतंत्र निर्णय ले सकते हैं।
न्यायालय ने कहा,
“याचिका में वर्णित तथ्यों की निस्संदेह जांच की आवश्यकता होगी, इस तथ्य के बावजूद कि सभी कृत्यों का लाभार्थी कोई बाहरी व्यक्ति नहीं बल्कि याचिकाकर्ता का परिवार है। याचिका खारिज की जाती है।”
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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा
17 ए के आवेदन के संबंध में न्यायालय ने कहा,”तथ्यों और स्थिति के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17 ए के तहत मंजूरी लेना अनिवार्य है। धारा 17 ए कहीं भी पुलिस अधिकारी को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 200 या बीएनएसएस की धारा 220 के तहत किसी लोक सेवक के खिलाफ दर्ज निजी शिकायत में मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं बताती है। शिकायतकर्ता का यह कर्तव्य है कि वह ऐसी स्वीकृति प्राप्त करे।”
इसके बाद हाईकोर्ट ने आगे कहा कि राज्यपाल के स्वीकृति आदेश में किसी भी तरह का विचार न करने का दोष नहीं है। इसने आगे कहा कि यह कोई ऐसा मामला नहीं है, जिसमें विचार न करने का दिखावा हो बल्कि वास्तव में विचार का भरपूर उपयोग हो।
हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री की उस याचिका पर आदेश पारित किया, जिसमें राज्यपाल थावर चंद गहलोत द्वारा जारी उस आदेश को रद्द करने की मांग की गई, जिसमें मूड़ा से संबंधित कथित बहु-करोड़ के घोटाले में सिद्धारमैया पर मुकदमा चलाने की स्वीकृति दी गई। आदेश के बाद लोकायुक्त पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया।
केस टाइटल: सिद्धारमैया और कर्नाटक राज्य और अन्य
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साभार: लाइव लॉ
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