घटना के 21 वर्ष बाद चोरी का आरोपी बरी, पुलिस ने 2004 की चोरी में पेश किया 2006 का माल

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा की एक अदालत ने 21 साल पुराने चोरी के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए साक्ष्य के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया है।

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम विनीता सिंह की अदालत ने पुलिस की विवेचना और बरामदगी पर सवाल खड़े करने वाले इस मामले में आरोपी हन्नो निवासी छोटी पहाड़ी, थाना खेरागढ़ को दोषमुक्त करार दिया है। इस मामले में पुलिस की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला थाना जगदीशपुरा में दर्ज किया गया था। 19 अक्टूबर 2004 की देर रात वादी मुकदमा अवधेश कुमार गुप्ता के जनरल स्टोर का ताला तोड़कर अज्ञात चोरों ने चोरी की वारदात को अंजाम दिया था।

चोरों ने वादी की दुकान से घी, रिफाइंड, सिगरेट के पैकेट, पान मसाला, फेस क्रीम, चाय पत्ती, डालडा, पेस्ट और नगदी सहित अन्य सामान चुरा लिया था। इन चोरों ने दो दिन के अंतराल में कुछ अन्य स्थानों पर भी चोरियां की थीं।

घटना के बाद 23 नवंबर 2004 को शाहगंज थाना पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर वायु विहार पथोली स्टेशन के पास से हन्नो के अलावा शरीफ, रामकिशोर, संजय उर्फ निजामुद्दीन और एक महिला राजकुमारी को गिरफ्तार किया था।

पुलिस ने इनके पास से चोरी का भारी मात्रा में सामान बरामद करने का दावा किया था। पूछताछ में इन आरोपियों ने वादी अवधेश कुमार गुप्ता के साथ-साथ नजीर खान, सतीश शर्मा, भूपेंद्र आदि की दुकानों में भी चोरी की बात कबूल की थी।

सुनवाई के दौरान आरोपी शरीफ की मृत्यु हो गई और अन्य आरोपियों की पत्रावली अलग होने के कारण सिर्फ हन्नो का ही विचारण किया गया।

इस मामले के ट्रायल में अभियोजन और पुलिस की भारी लापरवाही उजागर हुई। 20 वर्षों तक चले विचारण में केवल वादी अवधेश कुमार गुप्ता और मात्र एक पुलिसकर्मी उमेश कुमार शर्मा की ही गवाही दर्ज हो सकी।

अदालत द्वारा गिरफ्तारी और बरामदगी साबित करने के लिए बार-बार निर्देश और प्रतिकूल आदेश पारित किए गए, इसके बावजूद शेष एक दर्जन पुलिस और पब्लिक गवाह अदालत में पेश नहीं हुए।

मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह रहा कि वादी की दुकान में चोरी वर्ष 2004 में हुई थी, लेकिन अदालत में पुलिस द्वारा जो बरामद माल पेश किया गया वह भविष्य का था।

पेश किए गए कोलगेट, साबुन आदि पर निर्माण का वर्ष 2005 और डालडा पर निर्माण का वर्ष 2006 अंकित था।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता शुभम झा ने इस तथ्य को अदालत के समक्ष प्रमुखता से उठाया और पुलिस की फर्जी बरामदगी साबित की।

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम माननीय विनीता सिंह की अदालत ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता शुभम झा के तर्कों को सुना।

न्यायालय ने साक्ष्यों के भारी अभाव, गवाहों की अनुपस्थिति और पुलिस द्वारा पेश की गई त्रुटिपूर्ण बरामदगी को देखते हुए आरोपी हन्नो को घटना के 21 वर्ष बाद बरी करने का आदेश दिया।

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विवेक कुमार जैन
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