“अंतिम सांस तक लड़ेंगे खंडपीठ की लड़ाई”: आगरा के अधिवक्ताओं ने जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट लागू करने की भरी हुंकार

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आगरा।

“उच्च न्यायालय की खंडपीठ आगरा का अधिकार है और इसे हम हर कीमत पर लेकर रहेंगे।”

यह उद्गार उच्च न्यायालय खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति के संयोजक मनीष सिंह एडवोकेट ने व्यक्त किए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आगरा के अधिवक्ता और जनमानस जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट को लागू कराने के लिए एक निर्णायक और प्रभावी आंदोलन चलाने जा रहे हैं।

69 वर्षों का लंबा संघर्ष:

1956 से आज तक मनीष सिंह ने आंदोलन के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए बताया कि आगरा में खंडपीठ की मांग 1956 में शुरू हुई थी।

पिछले 69 वर्षों से आगरा का अधिवक्ता समाज निरंतर संघर्षरत है। इसी आंदोलन के दबाव में वर्ष 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने जसवंत सिंह आयोग का गठन किया था।

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जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट और उपेक्षा:

आयोग ने 1984 में अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी, जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खंडपीठ के लिए आगरा को सर्वाधिक उपयुक्त स्थान माना गया था। इसके बावजूद, दशकों बीत जाने के बाद भी इस रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, जिसे लेकर आगरा के अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश है।

आंदोलन के प्रमुख पड़ाव:

बैठक के दौरान संघर्ष के ऐतिहासिक चरणों पर भी चर्चा की गई:

* 1986: आगरा से दिल्ली तक ऐतिहासिक पैदल मार्च।

* 25 सितंबर 2001: नगला चंद्रभान में प्रधानमंत्री की सभा में जोरदार प्रदर्शन।

* 26 सितंबर 2001: दीवानी परिसर में पुलिस द्वारा अधिवक्ताओं पर बर्बर लाठीचार्ज।

* 2009-2012: आगरा बंद, ताजमहल पर प्रदर्शन और दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुंकार।

* 2025: हाल ही में संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से मिलकर आगरा का पक्ष मजबूती से रख चुका है।

जनता के साथ मिलकर होगा बड़ा आंदोलन:

संयोजक मनीष सिंह ने कहा कि खंडपीठ न मिलने के कारण कई बार आगरा का न्यायिक क्षेत्राधिकार भी प्रभावित हुआ, लेकिन अधिवक्ता पीछे नहीं हटे।

उन्होंने घोषणा की कि जल्द ही आगरा की जनता को साथ लेकर एक व्यापक जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा। जब तक जसवंत सिंह आयोग की सिफारिशें लागू नहीं होतीं, संघर्ष समिति चैन से नहीं बैठेगी।

“आगरा में खंडपीठ की स्थापना के लिए आगरा का अधिवक्ता और जनमानस संकल्पित है। यह लड़ाई केवल वकीलों की नहीं, बल्कि सुलभ न्याय चाहने वाले हर नागरिक की है।” — मनीष सिंह एडवोकेट, संयोजक (खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति, आगरा)

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विवेक कुमार जैन
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