आगरा।
अफीम डोडा पाउडर बरामदगी के 14 साल पुराने एक मामले में विशेष न्यायालय (NDPS एक्ट) ने बड़ा फैसला सुनाया है।
विशेष न्यायाधीश माननीय विवेक कुमार ने साक्ष्यों के अभाव और कानूनी प्रक्रियाओं के उल्लंघन के चलते आरोपी महिला सहित तीन लोगों को बरी करने के आदेश दिए हैं।
क्या था मामला ?
घटना 14 साल पुरानी है, जब फतेहपुर सीकरी थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष विनोद कुमार मिश्रा ने पुलिस टीम के साथ ओलेंडा रेलवे स्टेशन पर छापेमारी की थी।
पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर ग्राम तुलसीपुरा निवासी श्रीमती रजनी, वीरपाल सिंह और मुन्नी सिंह को गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि इनके पास से 7 किलोग्राम अफीम डोडा पाउडर बरामद हुआ था।
पुलिस ने इनके खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 8/15 के तहत मुकदमा दर्ज कर इन्हें जेल भेजा था।
इन आधारों पर हुए बरी:
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों के अधिवक्ता नीरज पाठक ने अदालत के सामने पुलिस की कहानी पर कई सवाल उठाए। अदालत ने अपने फैसले में बरी करने के
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मुख्य कारण स्पष्ट किए:
* स्वतंत्र गवाह का अभाव: सार्वजनिक स्थान (रेलवे स्टेशन) से गिरफ्तारी होने के बावजूद पुलिस किसी भी स्वतंत्र राहगीर या स्थानीय व्यक्ति को गवाह नहीं बना सकी।
* गवाही में विरोधाभास: पुलिस कर्मियों की गवाही में आपस में काफी अंतर और गंभीर विरोधाभास पाए गए।
* कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन: न्यायालय ने पाया कि पुलिस ने बरामदगी के समय NDPS एक्ट में अनिवार्य रूप से वर्णित विधिक प्रावधानों का पालन नहीं किया था।
अदालत का फैसला:
विशेष न्यायाधीश माननीय विवेक कुमार ने बचाव पक्ष के तर्कों से सहमत होते हुए कहा कि केवल पुलिस की गवाही और त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया के आधार पर आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में तीनों आरोपियोंरजनी, वीरपाल सिंह और मुन्नी सिंह को दोषमुक्त (बरी) करने का आदेश दिया।
मामले का संक्षिप्त विवरण:
* घटना: 7 किलो डोडा पाउडर की कथित बरामदगी।
* थाना: फतेहपुर सीकरी, आगरा।
* अधिवक्ता: नीरज पाठक।
* अदालत: विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस (NDPS) एक्ट माननीय विवेक कुमार।
* मुख्य कारण: विधिक प्रावधानों का उल्लंघन और स्वतंत्र साक्षियों का न होना।
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