एफआईआर रद्द करने व गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग में दाखिल याचिका खारिज
आगरा / प्रयागराज 21 सितंबर।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाकिस्तानी नागरिक की मौत का फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर उसकी संपत्ति राजस्व अभिलेखों में अपने नाम दर्ज कराने वाले से खरीदने के आरोपियों को राहत देने से इंकार कर दिया है। याचिका में दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
Also Read - नाबालिग के साथ रेप कर शादी के लिए बेचने वाले आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने की खारिजकोर्ट ने आरोप संज्ञेय माना और हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति वी.के. बिड़ला तथा न्यायमूर्ति ए.के.सिंह देशवाल की खंडपीठ ने फरहाना व सदरूल इस्लाम की याचिका पर दिया है।
एक अन्य खरीदार मोहित सचान की याचिका को कोर्ट ने पोषणीय नहीं माना कहा वह एफआईआर में नामित नहीं है। याचिका खारिज करते हुए कहा वह कानून के तहत कार्यवाही कर सकते हैं।

याचिका पर शासकीय अधिवक्ता ए.के. सण्ड ने प्रतिवाद किया। मालूम हो की देश के बंटवारे के समय कानपुर देहात, थाना भोगनीपुर की रहने वाली जाफरी बेगम पाकिस्तान चली गई थी और वहीं की नागरिकता ले ली।वह 2008 में कुछ दिन के लिए भारत आई थीं और कराची वापस चली गई थी। कराची में 28 जनवरी 11 को अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
Also Read - इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रधानमंत्री मोदी के चुनाव के खिलाफ याचिका की सुनवाई 18 अक्टूबर कोएक एजाज अहमद ने वारिस के तौर पर जाफरी बेगम की संपत्ति अपने नाम दर्ज करा ली। 7 मार्च 4 को जाफरी बेगम की मौत के फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए ऐसा किया गया। इस धोखाधड़ी में याची सदरूल इस्लाम व इनकी बीबी फरहाना के शामिल होने का आरोप है।
जाफरी बेगम की मौत के बाद जांच की गई तो पासपोर्ट से पता चला 28 फरवरी 08 को वह भारत आई थीं और 3 अप्रैल 8 को कराची वापस चली गई। 28 जनवरी 11 को कराची के अस्पताल में जाफरी बेगम की मौत हुई है। 7 मार्च 04 को उसकी झूठी मौत का बयान दिया गया। बड़ी धोखाधड़ी हुई जिसपर 5 अगस्त 24 को भोगनीपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई।
याची का कहना था कि उसने एजाज अहमद से जमीन खरीदी है। राजस्व अभिलेखों में उनका नाम दर्ज था। उसने कोई अपराध नहीं किया है। एफआईआर रद्द किया जाय।
यह भी कहा कि एक अन्य केस में पुलिस ने चार्जशीट दी थी। जिसे एजाज अहमद ने हाईकोर्ट में पक्षकारों के बीच समझौते के आधार पर चुनौती दी थी। केस कार्यवाही रद्द कर दी गई है। अब उसी मामले में दूसरी एफआईआर दर्ज करना कानूनी प्रक्रिया का दुरूपयोग है।

शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि उस समझौते का इस केस से सरोकार नहीं है। वह प्राइवेट पक्षकारों के बीच समझौते का मामला था। जाफरी बेगम के पाकिस्तान जाने के कारण निष्क्रांत संपत्ति संपत्ति हो गई थी। जो सरकार में निहित हो गई थी।धोखधड़ी कर अपने नाम दर्ज कराकर बेची गई जो अपराध है।
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