आगरा: २१ जुलाई ।
धोखाधड़ी, दलित उत्पीड़न, आईटी एक्ट और अन्य धाराओं के तहत आरोपित शैलेंद्र अग्रवाल, पुत्र मुरारी लाल अग्रवाल (निवासी डेंपियर नगर, मथुरा, हाल निवासी 17 विभव नगर, थाना ताजगंज), को सबूतों के अभाव में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट ने बरी कर दिया है।
यह मामला थाना ताजगंज में श्रीमती श्वेता सिंह उर्फ रंजीता सिंह, पत्नी विजय सिंह चक (निवासी मोहल्ला हाथी खाना, फतेहगढ़, जिला फर्रुखाबाद) द्वारा दर्ज कराया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके पति, जो आगरा में जीआरपी आगरा सिटी चौकी पर नियुक्त हैं, को जानकारी मिली थी कि शैलेंद्र अग्रवाल के कई कोल्ड स्टोरेज हैं और वह आलू के एक बड़े व्यापारी हैं। कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी उनके व्यवसाय में पैसा लगाया था, जिस पर उन्हें 35 प्रतिशत प्रति वर्ष का लाभ मिलता था।
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श्रीमती सिंह ने आरोपी से संपर्क कर खुद और रिश्तेदारों के 10 लाख रुपये उसके व्यवसाय में लगा दिए। जब उन्होंने एग्रीमेंट की बात कही तो आरोपी ने टाल दिया। बाद में उन्हें पता चला कि आरोपी ऐसे ही लोगों से पैसे लेकर कहीं और लगा देता है। रकम मांगने पर आरोपी ने केवल डेढ़ लाख रुपये दिए और बाकी देने से इनकार कर दिया।
श्रीमती सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने डीजीपी के सीयूजी नंबर से उनके पति को धमकाया, जिससे वे अवसादग्रस्त हो गए। बाद में पता चला कि आरोपी ने इंटरनेट का उपयोग करके फर्जी फोन कराया था।
इस मामले में वादनी और उनके पति सहित 7 गवाहों की गवाही दर्ज की गई थी। इस मामले के अलावा, आरोपी के खिलाफ विभिन्न थानों में धोखाधड़ी के कई मुकदमे दर्ज किए गए थे, जिनमें से अधिकांश में आरोपी ने वादी से समझौता कर लिया था।
अदालत ने साक्ष्य के अभाव और आरोपी के अधिवक्ता दिनेश कुमार अग्रवाल के तर्कों के आधार पर आरोपी को बरी करने का आदेश दिया।
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