एडीजे कोर्ट का फैसला: डॉक्टर और स्वतंत्र गवाहों के बयान पर निर्दोष साबित हुए राममूर्ति और ओमकार
आगरा।
आगरा की अदालत ने 2016 के हत्या के प्रयास के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दो सगे भाइयों राममूर्ति और ओमकार (पुत्र प्रेम सिंह, निवासी नगला भगतू, थाना निबोहरा) को दोषमुक्त कर दिया है।
एडीजे-8 माननीय संजय के लाल की अदालत ने दोनों भाइयों को डॉक्टर की रिपोर्ट और स्वतंत्र गवाहों के बयानों के आधार पर निर्दोष माना।
अदालत में यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों के भाई की पूर्व में हत्या करने वाले परिवार ने ही दबाव बनाने के लिए यह झूठा मुकदमा दर्ज कराया था।
पूर्वरंजिश और हत्या का प्रतिशोध:
अदालत के विचारण के दौरान यह बात सामने आई कि यह पूरा विवाद पुरानी रंजिश से उपजा था। आरोपियों के वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश शर्मा ने अदालत को बताया कि 7 सितंबर 2015 को आरोपियों के भाई गजेंद्र की निर्मम हत्या कर दी गई थी।

इस हत्या के आरोपी वादिनी शकुंतला के पुत्र (वीरू, पवन) और भतीजे (बनवारी) थे। हत्या के बाद हत्यारोपियों का परिवार गांव छोड़कर अन्य जगह रहने लगा था।
यह हत्या प्रयास का मुकदमा उसी हत्या के मुकदमे में दबाव बनाने की साजिश का हिस्सा था।
झूठे आरोप की कहानी:
थाना मनसुखपुरा में दर्ज मामले के अनुसार, वादिनी मुकदमा श्रीमती शकुंतला (पत्नी महावीर सिंह, हाल निवासी देव खैरा, धौलपुर) ने आरोप लगाया था कि 13 नवंबर 2016 को जब वह अपनी पुत्री की ससुराल जा रही थीं, तब प्रेम सिंह के पुत्रों राममूर्ति और ओमकार ने तासोड चौराहे पर उन्हें लात मारकर गिरा दिया और उनके पति महावीर सिंह की छाती में गोली मारकर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। वादिनी का आरोप था कि मोटरसाइकिल सवारों के आने पर आरोपी दूसरा फायर किए बिना हथियार लहराते हुए भाग गए।
मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों ने खोली पोल:
अभियोजन पक्ष की कहानी पर तब संदेह हुआ जब बचाव पक्ष के अधिवक्ता अवधेश शर्मा ने कई अहम तथ्य अदालत के संज्ञान में लाए:
* गोली का रहस्य: वादिनी ने एक गोली चलाने का आरोप लगाया, लेकिन घायल महावीर सिंह के मेडिकल में सीने पर दो घाव पाए गए और घाव में कोई गोली नहीं मिली। बाद में, चुटैल का उपाध्याय अस्पताल और मयूर हॉस्पिटल में इलाज हुआ, जहां कथित तौर पर ऑपरेशन कर गोली निकाली गई। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने गोली निकालने वाले डॉक्टर की गवाही नहीं कराई।
* स्वतंत्र गवाहों का अभाव: व्यस्त चौराहे के बावजूद, वादिनी और उसके पति को छोड़कर किसी ने घटना होते नहीं देखी, न ही कोई स्वतंत्र गवाह सामने आया।

* दोषमुक्त भाइयों की उपस्थिति: बचाव पक्ष की तरफ से पेश गवाह जहान सिंह और रामवीर उर्फ भल्ला ने स्पष्ट गवाही दी कि घटना के समय वे घटनास्थल से एक खेत दूर थे और आरोपी भाई वहां मौजूद नहीं थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुटैल (महावीर सिंह) ने स्वयं चोट बनाकर यह झूठा षड्यंत्र रचा था। गवाहों ने यह भी बताया कि कथित घटना के दौरान राममूर्ति पाली, राजस्थान में था और ओमकार घर पर मौजूद था।
* हथियार बरामद नहीं: पुलिस द्वारा घटना में प्रयुक्त न तो कोई हथियार बरामद किया गया और न ही आरोपी जिस मोटरसाइकिल से आए थे, उसे ही बरामद किया गया।
एडीजे-8 माननीय संजय के लाल ने सभी साक्ष्यों और वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश शर्मा के तर्कों को स्वीकार करते हुए पाया कि आरोपी भाइयों को झूठा फंसाया गया था, जिसके बाद दोनों भाईयों को दोषमुक्त करने का आदेश दिया गया।
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