आगरा।
विशेष न्यायाधीश (SC/ST एक्ट) माननीय शिव कुमार की अदालत ने धोखाधड़ी, जमीन पर अवैध कब्जे के प्रयास और दलित उत्पीड़न के आरोपी रमाकांत शर्मा की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है।
अदालत ने पुलिस जांच की रिपोर्ट और बचाव पक्ष के तर्कों को आधार मानते हुए आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि:
यह मामला आगरा के थाना सिकंदरा में श्रीमती कुसुमलता द्वारा दर्ज कराया गया था।
वादिनी का आरोप था कि:
* उनके दिवंगत पति उदयवीर सिंह ने वर्ष 2003 में शास्त्रीपुरम योजना में 162 वर्ग मीटर का एक प्लॉट एडीए (ADA) से खरीदा था।
* पति की मृत्यु (2016) के बाद, आरोपी रमाकांत शर्मा और अन्य ने कथित तौर पर एक फर्जी वसीयत तैयार की।
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* आरोप के अनुसार, 8 दिसंबर 2021 को आरोपियों ने प्लॉट पर कब्जे का प्रयास किया और विरोध करने पर वादिनी के साथ गाली-गलौज करते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी एवं जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया।
जमानत का मुख्य आधार:
सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता राम गोपाल बघेल ने दलीलों के माध्यम से कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल को इस मामले में गलत तरीके से घसीटा गया है।
अदालत ने जमानत मंजूर करते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर गौर किया:
* पुलिस जांच की रिपोर्ट: मामले की विवेचना के दौरान पुलिस को आरोपी रमाकांत शर्मा के खिलाफ अपराध में कोई प्रत्यक्ष संलिप्तता (Involvement) नहीं मिली।
* तर्कों की प्रबलता: बचाव पक्ष ने कोर्ट को संतुष्ट किया कि मामला सिविल प्रकृति का हो सकता है और आपराधिक आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं हैं।
कोर्ट का निर्णय:
अदालत ने परिस्थितियों और पुलिस की क्लीन चिट को ध्यान में रखते हुए रमाकांत शर्मा (निवासी राजनगर, आगरा) के जमानत प्रार्थना पत्र को स्वीकृत कर लिया और संबंधित जेल प्रशासन को रिहाई के निर्देश जारी किए।
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