आगरा/प्रयागराज १८ अप्रैल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक डीएम के ध्वस्तीकरण आदेश पर लगाई रोक।
हाईकोर्ट ने याचिका पर राज्य सरकार से तीन हफ्ते में मांगा काउंटर एफिडेविट।
उसके अगले दो हफ्ते के अंदर याची से रिज्वाइंडर दाखिल करने को कहा है।
डीएम द्वारा 22 अगस्त 2024 को पारित ध्वस्तीकरण आदेश को दी गई है चुनौती।
23 मई 2025 को होगी मामले के लिए सुनवाई।
वक्फ सुन्नी मदीना मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष हैदर अली की ओर से दाखिल याचिका।
याचिका पर सीनियर एडवोकेट फरमान अहमद नकवी ने रखा पक्ष।
सरकार की ओर से चीफ स्टैंडिंग काउंसिल जे एन मौर्य ने दलीलें पेश की।
जस्टिस मनीष कुमार निगम की सिंगल बेंच में हुई सुनवाई।
याची का कहना है कि 1976 में ग्राम सभा मलवा द्वारा गई की गई तीन बिस्वा जमीन पर मस्जिद बनी हुई है।
यह जमीन अब तालाब की भूमि बताई जा रही है।
इसी जमीन के एक हिस्से में 6-7 अन्य लोग काबिज हैं, जिन्हें 2021 में हटाने का आदेश हुआ है।
लेकिन अब तक उस आदेश पर कोई अमल नहीं हुआ है।
जबकि जिस जमीन पर मस्जिद बनी हुई है।
26 दिन में सभी कार्यवाही पूरी कर ली गई।
मस्जिद कमेटी को पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया गया।
तहसीलदार ने तालाब की जमीन बताते हुए नोटिस जारी किया।
इसके खिलाफ डीएम के समक्ष मस्जिद कमेटी ने अपील दाखिल की।
डीएम ने अपील खारिज करते हुए ध्वस्तीकरण आदेश पारित कर दिया है।
डीएम के ध्वस्तीकरण आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
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