आगरा १४ मई ।
आगरा जिला न्यायालय में दायर राणा सांगा केस की पुनरीक्षण याचिका में सुनवाई करते हुए जिला जज माननीय संजय कुमार मालिक ने पक्षगण के अधिवक्ता गण को सुनकर आदेश पारित करने आदेश किया ।
वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि 9 मई को जिला जज महोदय के समक्ष 10 अप्रैल को राणा सांगा केस को सिविल जज (सी०डि०) द्वारा खारिज करने के विरुद्ध रिवीजन दायर की जिसमें 9 मई व 13 मई को सुनवाई हुई। जिसमें माननीय जिला एवं सत्र न्यायालय ने पाया कि 10 अप्रैल के सिविल जज (सी०डि०) आगरा के आदेश में विधिनुसार खामियां है ।
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जिस पर न्यायालय ने वादी पक्ष के अधिवक्ता शिव आधार सिंह तोमर, नरेश सिकरवार, एस पी सिंह सिकरवार को सुना व जिसमें जिला न्यायालय ने पाया कि 10 अप्रैल के आदेश में निचली अदालत द्वारा ऐसा कोई प्रेक्षण नहीं किया कि कथित बयान संसद में दिया गया था कि नहीं एवं ऐसे बयान पर आधारित मूलवाद की सुनवाई की क्षेत्राधिकारिता किस प्रकार नहीं है। धारा 9 सीपीसी का हवाला दिए हुए जिला न्यायालय ने कहा कि जब तक वर्जित न हो, न्यायालय सभी सिविल वादों का विचारण करेंगे।
न्यायालयों को उन वादों के सिवाय जिनका उनके द्वारा संज्ञान अभिवयक्त या विवक्षित रूप से वर्जित है, सिविल प्रकृति के सभी वादों के विचारण की अधिकारिता होगी।
न्यायालय ने कहा कि निचली अदालत द्वारा यह भी देखना था कि प्रश्नगत मामले में कोई संपत्ति अथवा पद का प्रश्न अंतर्निहित है ? एवं क्या प्रश्नगत प्रकरण में केंद्र सरकार को पक्षकार बनाया जाना आवश्यक है अथवा नहीं ?
जिसके संबंध में निचली अदालत द्वारा कोई विचार नहीं किया गया। जिला न्यायालय ने संबंधित निचली अदालत को आदेश दिया कि वह आदेश में वर्णित प्रेक्षणों एवं बिंदुओं पर पक्षगण के विद्वान अधिवक्तागण को पुनः सुनकर विधि सम्मत आदेश पारित किया जाना सुनिश्चित करें।
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