अवैध धर्मांतरण मामला: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दी तमिलनाडु के आरोपी को जमानत, FIR की वैधता पर उठाए सवाल

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आगरा/प्रयागराज।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मिर्जापुर में 60 से अधिक लोगों के कथित अवैध धर्मांतरण के आरोपी देव सहायम डेनियल राज की जमानत याचिका मंजूर कर ली है।

न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने आरोपों की प्रकृति, साक्ष्यों और जेल में बिताई गई अवधि को देखते हुए यह आदेश पारित किया।

मामले की पृष्ठभूमि और आरोप:

तमिलनाडु निवासी डेनियल राज और उसके साथी पारस को 30 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। यूपी पुलिस का आरोप है कि डेनियल ‘इंडियन मिशनरीज सोसाइटी’ का फील्ड इंचार्ज है और वह एक ऐसे गिरोह का संचालन कर रहा था जो गरीब आदिवासियों और महिलाओं को ‘हीलिंग प्रेयर’ व वित्तीय सहायता का लालच देकर ईसाई धर्म में परिवर्तित कराता था। पुलिस के अनुसार, आरोपी अब तक 70 लोगों का धर्मांतरण करा चुका था और 500 अन्य लोगों के धर्मांतरण की योजना बना रहा था।

जमानत का मुख्य कानूनी आधार:

बचाव पक्ष के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के राजेंद्र बिहारी लाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले के हालिया फैसले पर भरोसा जताते हुए तर्क दिया कि:

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* अधिकार क्षेत्र का अभाव: यूपी गैर-कानूनी धर्मांतरण निषेध अधिनियम, 2021 की धारा 4 के अनुसार, केवल पीड़ित व्यक्ति, उसका सगा संबंधी या निकटतम परिवार का सदस्य ही शिकायत दर्ज करा सकता है।

* अनधिकृत शिकायतकर्ता: इस मामले में FIR इंद्रसेन सिंह नामक व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई थी, जो न तो स्वयं पीड़ित है और न ही किसी पीड़ित का रिश्तेदार।

* साक्ष्य की कमी: अभियुक्तों के पास से कोई भी आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई और उन्हें केवल संदेह के आधार पर झूठा फंसाया गया है।

कोर्ट का निर्णय:

अदालत ने माना कि कानून की वैधानिक योजना के अनुसार, अवैध धार्मिक धर्मांतरण के कथित अपराध के लिए मुकदमा शुरू करने का दायरा सीमित है।

साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की कोई उचित आशंका न होने और अभियुक्त के सितंबर 2025 से जेल में होने के आधार पर कोर्ट ने सशर्त जमानत मंजूर की।

अब हाई कोर्ट का यह फैसला उन मामलों में नजीर बनेगा जहाँ ‘थर्ड पार्टी’ (तीसरे पक्ष) द्वारा धर्मांतरण की शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं, जबकि कानून की धारा 4 शिकायतकर्ता की पात्रता को लेकर बहुत स्पष्ट है।

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मनीष वर्मा
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