पति पत्नी के मध्य चल रहे हैं पारिवारिक विवाद के कारण दिल्ली में मुकदमा लड़ते लड़ते आगरा आ गये ससुर -दामाद

न्यायालय मुख्य सुर्खियां
दामाद नें ससुर एवं अन्य के विरुद वर्ष 2019 में स्वयं पर हमले के आरोप में किया था परिवाद
दामाद का आरोप हल्की धारा में किया आरोपियों को तलब जबकि ससुर ने घटना को नितांत फर्जी बताया था
दोनो ने सत्र न्यायालय में किया था रिवीजन, अदालत ने दामाद का रिवीजन किया खारिज, ससुर का किया स्वीकृत

आगरा 10 फरवरी ।

एक ही आदेश के विरुद्ध प्रतिद्वंद्वी दामाद एवं ससुर द्वारा सत्र न्यायालय में रिवीजन करने पर एडीजे माननीय परवेज अख्तर ने दामाद का रिवीजन खारिज करने एवं ससुर का रिवीजन स्वीकृत करने के आदेश दिये।

मामले के अनुसार तरुण मलिक पुत्र स्व. अरुण मलिक निवासी पीतम पुरा नई दिल्ली की शादी 29 अप्रेल 2013 को मुकेश गुप्ता निवासी रोहणी दिल्ली की पुत्री श्रीमती निधि कें साथ हुई थी। दोनों कें मध्य पारिवारिक विवाद होने पर दोनों पक्षो ने दिल्ली में एक दूसरे के विरुद्ध कई मुकदमें अदालतों मे दायर किये गये। इसी क्रम में तरुण मलिक नें 21 सितम्बर 2019 की घटना में स्वयं के ऊपर दिल्ली से पीछा करतें चलें आ रहें ससुर एवं अन्य के विरुद्ध हमलें का आरोप लगा न्यायिक मजिस्ट्रेट आगरा की अदालत में परिवाद प्रस्तुत किया था ।

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उसका आरोप था कि जब वह अपने इलाज हेतु आगरा आया तो ससुर एवं अन्य ने स्कोडा कार से पीछा कर आगरा आ उस पर हमला किया। अपने कथन के समर्थन में दामाद ने अपने दो मामा को भी गवाह के रूप में अदालत में पेश किया। अदालत ने उक्त परिवाद पर संज्ञान लें ससुर मुकेश गुप्ता एवं अन्य को 24 अगस्त 23 को भा.द.स.की धारा 323, 324 एवं 506 में मुकदमे के विचारण हेतु तलब करने के आदेश दिये थे।

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जिस पर दामाद ने इस आधार पर सत्र न्यायालय में रिवीजन किया कि अधीनस्थ न्यायालय नें आरोपियों को भा.द.स. की धारा 307 में तलब नहीँ कर विधिक त्रुटि कर हल्की धारा में तलब किया है। वहीँ ससुर ने स्वयं एवं कथित घटना कारित करने वालों की घटना वाले दिन दिल्ली में ही होने के साक्ष्य दें सत्र न्यायालय में रिवीजन किया। दोनों रिवीजन की एक ही अदालत में सुनवाई हुई ।

एडीजें माननीय परवेज अख्तर ने ससुर के वरिष्ठ अधिवक्ता राम प्रकाश शर्मा एवं मुनेंद्र प्रकाश यादव के तर्क पर दामाद का रिवीजन खारिज कर जहां अधीनस्थ न्यायालय द्वारा पारित आदेश को सही ठहराया वहीँ अधीनस्थ न्यायालय द्वारा ससुर एवं अन्य को तलब करने के बाबत प्रस्तुत आदेश को निरस्त करने के आदेश दिये।

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विवेक कुमार जैन
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