आगरा।
जनपद आगरा में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद से उपजी न्यायिक विसंगतियों और प्रशासनिक मनमानी को लेकर आगरा कलक्ट्रेट बार एसोसिएशन ने गहरा रोष व्यक्त किया है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अतिरिक्त प्रशासनिक न्यायमूर्ति जे जे मुनीर जी इलाहाबाद हाईकोर्ट से आगरा के सर्किट हाउस में भेंट कर एक विस्तृत ज्ञापन दिया है ।
जिसमें आगरा कमिश्नरेट के अंतर्गत चल रहे न्यायालयों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कानूनी अज्ञानता और प्रक्रिया के उल्लंघन का आरोप:
ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि आगरा कमिश्नरेट प्रणाली के तहत जिन पुलिस अधिकारियों को दण्डाधिकारी (Magistrate) की शक्तियां दी गई हैं, उन्हें न तो कानून की पर्याप्त जानकारी है और न ही वे कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं।
इसके कारण BNSS की धारा 126, 135, 170, 164 और गुंडा एक्ट के तहत होने वाली सुनवाई पूरी तरह दिशाहीन हो गई है।

वकीलों द्वारा उठाए गए मुख्य मुद्दे:
* दस्तावेजों में हेराफेरी: अदालती पत्रावलियों पर साक्ष्यों और दस्तावेजों की नंबरिंग नहीं की जा रही, जिससे महत्वपूर्ण कागजात गायब होने का खतरा बना रहता है।
* समय की अनिश्चितता: अधिकारियों के बैठने का कोई निश्चित समय नहीं है। अधिवक्ताओं और वादकारियों को रात 10-10 बजे तक इंतज़ार करना पड़ता है।
* अवैध वसूली और जेल भेजने का दबाव: आरोप है कि जमानत के लिए ₹50,000/- की दो जमानतें देने के बावजूद आरोपियों को जेल भेज दिया जाता है। साथ ही, ऑर्डर शीट पर यह गलत दर्ज किया जाता है कि “अभियुक्त जमानत देने में असमर्थ रहा।”

* दूरी की समस्या: बमरौली कटारा और पुलिस लाइन स्थित न्यायालयों की दूरी मुख्यालय से बहुत अधिक है। मलपुरा थाने के आरोपियों की पेशी 30 किमी दूर खेरागढ़ में कराई जा रही है, जिससे वादकारियों को भारी परेशानी हो रही है।
* कानून का उल्लंघन: वकीलों का कहना है कि वर्ष 2025 में धारा 116/135 BNSS में 5000 से ज्यादा लोगों को जेल भेजा गया, जबकि 7 साल से कम की सजा वाले मामलों में थाने से ही जमानत का प्रावधान है।
समिति बनाने की मांग:
कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि इस अव्यवस्था को सुधारने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं, बार अध्यक्ष और सचिव की एक निगरानी समिति बनाई जानी चाहिए।

यह समिति समय-समय पर अधिकारियों को सुझाव और शिकायतें देगी ताकि न्याय व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके। माननीय न्यायमूर्ति जे जे मुनीर से मिलने वाले अधिवक्ताओं में अध्यक्ष एडवोकेट बृजेन्द्र रावत, उपाध्यक्ष एडवोकेट बलवीर सिंह, एडवोकेट लोकेन्द्र शर्मा महासचिव, विनोद कुमार शुक्ला सचिव आगरा बार एसोसिएशन, एडवोकेट देवेन्द्र धाकरे संयुक्त सचिव आगरा बार एसोसिएशन, एडवोकेट गिरीश पाठक अध्यक्ष ग्रेटर आगरा बार एसोसिएशन, एडवोकेट अमित पाराशर सचिव ग्रेटर आगरा बार एसोसिएशन, एडवोकेट रवि चौबे सचिव एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन, एडवोकेट गिरीश कटारा कोषाध्यक्ष एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन और एडवोकेट प्रभाकर शर्मा शामिल थे ।
“न्याय व्यवस्था पुलिस के हाथों में सौंपने से अराजकता बढ़ गई है। यदि प्रक्रिया में सुधार नहीं हुआ तो वादकारियों का विश्वास सिस्टम से उठ जाएगा।”
बृजेन्द्र रावत ,अध्यक्ष , आगरा कलक्ट्रेट बार एसोसिएशन
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