आगरा:
अपनी पत्नी और दो नाबालिग बेटों को भरण पोषण (Maintenance) की राशि अदा न करने के मामले में, उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री रहे एक नेता को थाना मंटोला पुलिस ने गिरफ्तार कर आज अदालत में पेश किया।
अदालत में बकाया धनराशि के एवज में 40,000/- रुपये जमा करने के बाद, पूर्व मंत्री को अग्रिम तिथि पर संपूर्ण बकाया भुगतान की शर्त पर रिहाई मिल गई।
क्या है मामला?
* मुकदमा: थाना ताजगंज क्षेत्र निवासी पूर्व मंत्री की पत्नी ने पारिवारिक विवाद बढ़ने पर अपने और अपने 10 व 9 वर्षीय दो बेटों के भरण पोषण हेतु 23 सितंबर 2019 को धारा 125 सीआरपीसी के तहत अदालत में मुकदमा दायर किया था।
* कोर्ट का आदेश: अदालत ने 13 फरवरी 2023 को पूर्व मंत्री के विरुद्ध आदेश पारित किया था। इस आदेश के तहत, उन्हें पत्नी और दोनों बेटों के लिए प्रत्येक को 5-5 हजार रुपये यानी कुल 15,000/- रुपये प्रति माह की धनराशि मुकदमा दायर करने की तारीख (23 सितंबर 2019) से अदा करने का निर्देश दिया गया था।
* गिरफ्तारी का कारण: पूर्व मंत्री द्वारा यह भरण पोषण राशि अदा न किए जाने पर, बकाया वसूली हेतु थाना मंटोला पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था।
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अधिवक्ताओं के तर्क और रिहाई:
पूर्व मंत्री के अधिवक्ता रोहित राठौर एवं मंजू सिंह ने अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करते हुए सुप्रीम कोर्ट की नजीर का हवाला दिया कि रिकवरी से संबंधित वादों में सिविल प्रोसीजर लागू किया जाना चाहिए, न कि क्रिमिनल प्रोसीजर।
अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि विपक्षी (पूर्व मंत्री) अब तक पत्नी को ₹3,60,000/- पहले ही जमा कर चुके हैं, और अंतरिम भरण पोषण के रूप में भी ₹2,20,000/- जमा किए गए हैं, यानी कुल ₹5,80,000/- अदा किए जा चुके हैं। उन्होंने आज ₹40,000/- और जमा करने की बात कही।
अधिवक्ताओं ने यह तर्क भी दिया कि विपक्षी द्वारा 27 अक्टूबर 2025 को भी अदालत में ₹40,000/- जमा किए गए थे और पत्रावली पर अगली तारीख 17 नवंबर 2025 नियत थी, फिर भी पुलिस द्वारा कोई रिकवरी वारंट जारी न होने के बावजूद गिरफ्तारी की गई।
अदालत का फैसला:
अदालत ने पूर्व मंत्री का प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने यह सख्त शर्त रखी है कि शेष बकाया धनराशि ₹2,60,5,000/- (दो लाख साठ हज़ार पाँच सौ रुपये) अगली दिनांक 17 नवंबर 2025 तक अनिवार्य रूप से अदा की जाए।
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