डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी के चार कर्मियों के विरुद्ध परिवाद दर्ज

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा।

डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी के चार कर्मियों, जिनमें एक ऑफिस सुपरिटेंडेंट भी शामिल है, के विरुद्ध दलित उत्पीड़न एवं अन्य धाराओं के तहत विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) माननीय पुष्कर उपाध्याय ने परिवाद (शिकायत) दर्ज करने के आदेश दिए हैं। मामले में वादी (शिकायतकर्ता) के बयान दर्ज करने के लिए 30 अक्टूबर की तारीख तय की गई है।

क्या है मामला ?

वादी मुकदमा डॉ. अनिल कुमार (निवासी- राधिका विहार कॉलोनी, सिकंदरा, आगरा) ने विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट की अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था।
डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, वह पूर्व में यूनिवर्सिटी के पर्यावरण अध्ययन विभाग में कार्यरत थे।

उन्होंने अपना अनुबंध (Contract) बढ़ाने और स्थाई करने के संबंध में कुलाधिपति को प्रार्थना पत्र दिया था, जिसके निस्तारण हेतु यूनिवर्सिटी ने एक कमेटी का गठन किया था।

* उत्पीड़न का आरोप: डॉ. अनिल कुमार ने आरोप लगाया कि 1 जुलाई 2024 को वह आवासीय इकाई के ऑफिस सुपरिटेंडेंट मधुसूदन कृष्ण से मिले और उन्हें अपनी समस्या बताई। शुरू में उन्हें बैठने के लिए कुर्सी दी गई, लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि प्रार्थी अनुसूचित जाति से है, मधुसूदन कृष्ण भड़क गए। उन्होंने कुर्सी से खड़ा होने का आदेश दिया और जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए अभद्रता की।

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* मारपीट और धमकी: आरोप है कि विरोध करने पर मधुसूदन कृष्ण के साथ ऑफिस कर्मी सौरभ दुबे, शिवम सिंह, और अमिता वर्मा ने मिलकर प्रार्थी के साथ अभद्र व्यवहार किया। मधुसूदन कृष्ण ने उन्हें थप्पड़ मारा, धक्का देकर ऑफिस से बाहर निकाल दिया, और दोबारा आने पर जान से मारने की धमकी दी।

मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत:

प्रार्थी डॉ. अनिल कुमार ने इस घटना की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल और पुलिस आयुक्त से भी की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया।

अदालत ने यूनिवर्सिटी और पुलिस से इस प्रार्थना पत्र पर आख्या (रिपोर्ट) मांगी थी, लेकिन दोनों ही जगहों से प्रार्थी के विरुद्ध आख्या भेजी गई। इस पर संज्ञान लेते हुए, विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट माननीय पुष्कर उपाध्याय ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश न देकर, प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया और वादी के बयान के लिए 30 अक्टूबर की तारीख नियत की।

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विवेक कुमार जैन
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