आगरा:
स्थानीय अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय संख्या-1 माननीय यशवंत कुमार सरोज आगरा ने अपहरण और महिला को संबंधों लिए मजबूर करने के आरोपी संजय कुमार को साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है।
न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष अभियुक्त के विरुद्ध आरोपों को युक्ति-युक्त संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
मामले की पृष्ठभूमि और आरोप:
अभियोजन का मामला यह था कि 5 मार्च 2016 को आगरा कॉलेज में प्रवेश पत्र लेने गई पीड़िता लापता हो गई थी ।
पीड़िता के भाई (वादी) ने थाना लोहामण्डी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि अभियुक्त संजय कुमार ने उसकी बहन को बहला-फुसलाकर अगवा किया है।पुलिस ने अभियुक्त के विरुद्ध भा०दं०सं० की धारा 363 और 366 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था।
न्यायालय के निष्कर्ष और दोषमुक्ति के मुख्य आधार:
न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का परिशीलन करने के बाद निम्नलिखित महत्वपूर्ण निष्कर्ष दिए, जिसके आधार पर अभियुक्त को बरी किया गया:
* प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य का अभाव: न्यायालय ने पाया कि वादी मुकदमा (पी०डब्ल्यू-1) घटना का प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। उसने अपनी बहन को कॉलेज जाते हुए नहीं देखा था और न ही उसे यह पता था कि उसे कौन ले गया।
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* वादी का विरोधाभासी बयान: प्रतिपरीक्षा के दौरान वादी ने स्वयं स्वीकार किया कि “यह कहना गलत है कि मेरी बहन को कोई भगा कर ले गया हो”। साथ ही, उसने पुलिस द्वारा किसी भी प्रकार की शिनाख्त परेड (Identification Parade) कराए जाने से इंकार किया।
* पीड़िता की सहमति और मित्रता: अभियुक्त ने धारा 313 द०प्र०सं० के तहत अपने बयान में स्पष्ट किया कि पीड़िता उसकी लंबे समय से मित्र थी और वह अपनी स्वेच्छा से उसके साथ घूमने गई थी। अभियुक्त के अनुसार, पीड़िता स्वयं उसे मिलने के लिए आगरा बुलाई थी और वे साथ में सिकंदरा, लखनऊ और गोरखपुर गए थे।
* चिकित्सकीय परीक्षण से इंकार : पीड़िता ने अपने चिकित्सीय परीक्षण के दौरान अंदरूनी जांच कराने से मना कर दिया था, जिससे अभियोजन के आरोपों को वैज्ञानिक बल नहीं मिल सका।
* पीड़िता की आयु: हालांकि अभियोजन ने पीड़िता को नाबालिग बताया था, लेकिन अभियुक्त का पक्ष था कि वह बालिग थी और अपनी मर्जी से उसके साथ गई थी।
न्यायालय का आदेश:
पीठासीन अधिकारी माननीय यशवंत कुमार सरोज ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि अभियुक्त ने पीड़िता का व्यपहरण (Kidnapping) संभोग के आशय से किया था।
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साक्ष्यों में तात्विक विरोधाभास और पीड़िता की स्वेच्छा से जाने के तथ्यों को देखते हुए न्यायालय ने अभियुक्त संजय कुमार को दोषमुक्त घोषित कर दिया।
कानूनी संदर्भ:
यह निर्णय माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा ‘निपुन सक्सेना बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया’ में दिए गए पीड़िता की गोपनीयता बनाए रखने के निर्देशों के अनुपालन में सुनाया गया।
आरोपी की तरफ़ से प्रभावी पैरवी चौधरी समीर एडवोकेट, चौधरी कबीर एडवोकेट द्वारा की गई ।
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