आगरा।
नाबालिग से सामूहिक दुराचार, लाखों की वसूली और अश्लील वीडियो इंटरनेट पर वायरल करने के गंभीर मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) माननीय सोनिका चौधरी ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी प्रांशु की जमानत याचिका को सिरे से खारिज करने के आदेश दिए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि:
मामला थाना कमला नगर क्षेत्र का है। वादी द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, उसकी 14 वर्षीया नाबालिग बहन को करीब दो वर्ष पूर्व आरोपी प्रांशु, अभिषेक, अरुण और अभियुक्ता नीलम ने डरा-धमका कर अपने जाल में फंसा लिया था।
आरोप के मुख्य बिंदु:
* सामूहिक दुराचार: आरोपी अभिषेक ने पीड़िता को अपने घर बुलाकर जबरन दुराचार किया। इसके बाद अन्य आरोपियों ने भी डरा-धमका कर उसके साथ गलत काम किया।
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* ब्लैकमेलिंग एवं वसूली: आरोपियों ने पीड़िता की अश्लील वीडियो और फोटो बना ली थी। इनके बल पर पीड़िता को ब्लैकमेल कर उससे करीब 4 से 5 लाख रुपये की अवैध वसूली की गई।
* साइबर अपराध: जब पीड़िता ने और पैसे देने से इनकार कर दिया, तो आरोपियों ने प्रतिशोध में उसकी अश्लील वीडियो और फोटो इंटरनेट पर वायरल कर दी।
न्यायालय की कार्यवाही:
जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (ADGC) सुभाष गिरी ने तर्क दिया कि आरोपियों का कृत्य न केवल अमानवीय है, बल्कि समाज और एक नाबालिग के भविष्य के लिए अत्यंत घातक है।
उन्होंने पत्रावली पर मौजूद डिजिटल साक्ष्यों और पीड़िता के बयानों को मजबूती से अदालत के सामने रखा।
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न्यायालय का निर्णय:
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट माननीय सोनिका चौधरी ने दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का परिशीलन करने के बाद आरोपी प्रांशु को जमानत का लाभ देने से इंकार कर दिया।
न्यायालय ने माना कि इस प्रकार के जघन्य अपराधों में जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना बनी रहेगी।
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