आगरा/प्रयागराज:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए प्रयागराज के धूमनगंज थाने के दो पूर्व प्रभारियों (इंस्पेक्टर) को तलब किया है।
कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि दीवानी प्रकृति के विवाद में पुलिस ने हस्तक्षेप कर थाने को ही ‘सिविल कोर्ट’ में तब्दील कर दिया।
मामले का विवरण:
जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने संजय कुमार अग्रवाल और आयुष अग्रवाल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
मामला पैसों के लेनदेन से जुड़ा था, जिसे पुलिस ने आपराधिक रंग देते हुए हस्तक्षेप किया।
कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा:
“इसमें कोई संदेह नहीं कि यह विवाद मूल रूप से दीवानी (सिविल) प्रकृति का है। ऐसे मामलों में न तो एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए थी और न ही पुलिस को जांच करनी चाहिए थी।”
इंस्पेक्टरों पर वसूली और मारपीट के गंभीर आरोप:
याचिका में आरोप लगाया गया है कि धूमनगंज थाने में तैनात रहे दो पूर्व इंचार्ज, इंस्पेक्टर वैभव सिंह और इंस्पेक्टर अमरनाथ राय ने इस विवाद को अपने हाथ में लिया।

आरोप है कि उन्होंने शिकायतकर्ता के साथ मारपीट की, उसके सिक्योरिटी चेक छीन लिए और बलपूर्वक पैसे की वसूली का प्रयास कर मामले को “अपने तरीके” से सुलझाने की कोशिश की।
हाईकोर्ट के कड़े निर्देश:
अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित आदेश जारी किए हैं:
* व्यक्तिगत उपस्थिति: प्रयागराज पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया गया है कि वे दोनों पूर्व थाना प्रभारियों (वैभव सिंह और अमरनाथ राय) की 31 मार्च 2026 को दोपहर 2:00 बजे कोर्ट में व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करें।
* पक्षकार बनाने का निर्देश: कोर्ट ने दोनों इंस्पेक्टरों को याचिका में प्रतिवादी संख्या 5 और 6 के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया है।
* जवाबी हलफनामा: प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। 48 घंटे के भीतर पुलिस कमिश्नर के माध्यम से उन्हें नोटिस तामील कराने को कहा गया है।
* गिरफ्तारी पर रोक: कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं (संजय और आयुष अग्रवाल) को बड़ी राहत देते हुए, धूमनगंज थाने में दर्ज केस (क्राइम नंबर 410/2025) के तहत उनकी गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।
पुलिस कमिश्नर को जिम्मेदारी:
हाईकोर्ट ने इस आदेश की तामील के लिए रजिस्ट्रार (अनुपालन) और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के माध्यम से पुलिस कमिश्नर तक सूचना पहुँचाने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये दोनों इंस्पेक्टर वर्तमान में कहीं भी तैनात हों, उन्हें नियत तिथि पर अदालत के समक्ष हाजिर होना ही होगा।
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