आगरा / प्रयागराज 06 अक्टूबर।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्णय दिया है कि किसी गिरोह में सदस्य होने मात्र से उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में सजा नहीं दी जा सकती। इसके लिए उस व्यक्ति का गैंग में सक्रिय संलिप्तता होना जरूरी है।
किसी व्यक्ति को गैंगस्टर अधिनियम के तहत दंडित किए जाने के लिए, अदालत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने या भौतिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए। जैसा कि अधिनियम की धारा 2(बी) में उल्लिखित है।

न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिड़ला और न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय संलिप्तता के बिना किसी गिरोह में सदस्यता मात्र से उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के तहत सजा का औचित्य नहीं बनता। न्यायालय ने इसी के साथ सुकर्म पाल उर्फ अमित जाट के खिलाफ एफआईआर को खारिज कर दिया।
Also Read – स्कूल प्रबंधको सहित 6 के विरुद्ध मुकदमे हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत
कोर्ट ने इस बात पर जोर देते हुए कि गैंगस्टर अधिनियम की धारा 3(1) के तहत दर्ज एफआईआर में गैंगस्टर वाद के आरोप को पुष्ट करने के लिए धारा 2(बी) के संगत प्रावधानों का समावेश किया जाना आवश्यक है।
याची सुकर्म पाल उर्फ अमित जाट ने उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के अलीनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए याचिका दायर की। 14 फरवरी 2024 को स्वीकृत गैंग चार्ट के आधार पर गैंगस्टर अधिनियम की धारा 3(1) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
याची का कहना था कि एफआईआर अवैध रूप से दर्ज की गई है, क्योंकि इसमें तीन साल से अधिक समय पहले हुई घटनाओं का संदर्भ दिया गया है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि गैंगस्टर अधिनियम के आवेदन को उचित ठहराने के लिए तीन साल के भीतर कोई भी आपराधिक गतिविधि नहीं हुई थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी गिरोह में केवल सदस्यता ही सज़ा के लिए पर्याप्त नहीं ।
Also Read – जौनपुर अटाला मंदिर या मस्जिद ?
कोर्ट ने कहा
“किसी व्यक्ति को अधिनियम के तहत केवल इसलिए दंडित नहीं किया जा सकता है क्योंकि वह किसी समूह का सदस्य है।”

कोर्ट ने 29 फरवरी 2024 की एफआईआर और उससे संबंधित गैंग चार्ट को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि एफआईआर अवैध है क्योंकि यह गैंगस्टर अधिनियम की कानूनी आवश्यकताओं का अनुपालन नहीं करती है।
इसके अलावा, अदालत ने माना कि एफआईआर के आधार पर की गई कोई भी कार्रवाई गैरकानूनी थी और इसलिए इसे कायम नहीं रखा जा सकता है।
Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp – Group Bulletin & Channel Bulletin- प्रयागराज दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नगर निगम के ध्वस्तीकरण नोटिस पर लगाई रोक, यथास्थिति बनाए रखने का दिया आदेश - June 13, 2026
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिवक्ता जागृति शुक्ला मौत मामले में दिए न्यायिक जांच के आदेश, डॉक्टरों और वकीलों को हड़ताल खत्म करने के निर्देश - June 13, 2026
- बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की पोषणीयता पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में बहस, कोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए दिया चार सप्ताह का समय - June 13, 2026




