आगरा/प्रयागराज १ जुलाई ।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व विधायक मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद, जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने अपना निर्णय बाद में सुनाने के लिए रख लिया है।
अब्दुल्ला आजम खान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल कर रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहे दोनों मामलों की पूरी कार्यवाही को रद्द करने की मांग की है।
फर्जी पासपोर्ट मामला:
पहला मामला अब्दुल्ला आजम खान के फर्जी पासपोर्ट से जुड़ा है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक आकाश सक्सेना ने 30 जुलाई, 2019 को अब्दुल्ला आजम खान के खिलाफ रामपुर के सिविल लाइन थाने में धोखाधड़ी और पासपोर्ट एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।
आरोप है कि अब्दुल्ला आजम ने गलत दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाया था। शिकायत के अनुसार, उनके शैक्षिक प्रमाण पत्रों और पासपोर्ट विभाग को दी गई जानकारी में उनकी जन्मतिथि अलग-अलग है।
अब्दुल्ला को 10 जनवरी, 2018 को जारी पासपोर्ट संख्या जेड-4307442 में उनकी जन्मतिथि 30 सितंबर, 1990 बताई गई है, जबकि उनके शैक्षिक प्रमाण पत्रों में यह 1 जनवरी, 1993 है।
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दो पैन कार्ड का मामला:
दूसरा मामला अब्दुल्ला आजम खान के दो पैन कार्ड बनवाने से संबंधित है। बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने 6 दिसंबर, 2019 को रामपुर के सिविल लाइन थाने में अब्दुल्ला आजम खान और उनके पिता सपा नेता आजम खान के खिलाफ दो पैन कार्ड रखने के आरोप में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी। अब्दुल्ला के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी, 471, 468, 467 और 420 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
आकाश सक्सेना का आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान अपने चुनावी शपथ पत्र में गलत पैन नंबर दर्ज किया था। उनके अनुसार, अब्दुल्ला आजम ने चुनाव आयोग को दिए गए शपथ पत्र में पैन नंबर DWAPK7513R दिखाया था, जबकि आईटीआर (आयकर रिटर्न) दस्तावेजों में उन्होंने दूसरा पैन नंबर DFOPK6164K लिखा था। सक्सेना ने आरोप लगाया कि आजम खान ने धोखाधड़ी कर बेटे अब्दुल्ला आजम के लिए दो पैन कार्ड बनवाए थे ताकि उन्हें चुनाव लड़वाया जा सके।
दोनों ही मामलों में अब्दुल्ला आजम खान के खिलाफ एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रायल चल रहा है, जिसकी कार्यवाही को रद्द करने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शिकायतकर्ता आकाश सक्सेना की ओर से अधिवक्ता शरद शर्मा और समर्पण सक्सेना ने अदालत में अपना पक्ष रखा।
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