आगरा /प्रयागराज 22 अक्टूबर ।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हत्या के जुर्म में उम्रकैद काट रहे बांदा के रामचंद्र कुशवाहा की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली है।
न्यायमूर्ति अश्विनी मिश्र और न्यायमूर्ति डा. गौतम चौधरी की खंडपीठ ने बचाव पक्ष की इस दलील को स्वीकार कर लिया है कि अपीलकर्ता का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
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याची को मरने वाले के साथ आखिरी बार देखा गया था और इसी आधार पर उसे अभियुक्त बना दिया। सत्र न्यायाधीश बांदा ने 17 जुलाई को 2019 को उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है। वह 20 अगस्त 2015 से जेल में बंद है। हत्या का यह मामला नरैनी थाने में दर्ज में है।
कोर्ट में कहा गया कि बरी किए जाने की अपील की सुनवाई में समय लग सकता है। गवाह क्रमांक 10 ने स्वीकार किया है कि अभियुक्त उस व्यक्ति के साथ नहीं आया था जिसकी मौत हुई।
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कोर्ट ने अपीलकर्ता पर यह शर्त लगाई है कि संतुष्टि के लिए दो मुचलके भरेगा । साथ ही शपथपत्र पर न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष यह लिख कर देगा कि उसकी तरफ से अपील की सुनवाई में सहयोग किया जाएगा। साथ ही रिहाई के छह सप्ताह के भीतर आधी जुर्माना राशि जमा करेगा।
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