आगरा /प्रयागराज 14 सितंबर ।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सात साल से कम सजा वाले अपराध के आरोप में दर्ज एफआईआर के तहत पुलिस को बीएनएसएस की धारा 35 का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है और कहा है कि एफआईआर के आरोपों से संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है, ऐसे में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
इस धारा में विवेचना के लिए जरूरी होने पर अदालत की अनुमति से गिरफ्तारी करने का नियम है। अन्यथा गिरफ्तार नहीं किया जायेगा।
Also Read - इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने की मांग में जनहित याचिका पर राज्य सरकार से किया जवाब तलबयह आदेश न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता तथा न्यायमूर्ति सुरेंद्र सिंह प्रथम की खंडपीठ ने जौनपुर महराजगंज थाना क्षेत्र के निवासी संदीप यादव की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
याचिका पर अधिवक्ता शैलेश उपाध्याय ने बहस की। कोर्ट ने पुलिस को गिरफ्तारी के मामले में धारा 35 एवम सुप्रीम कोर्ट के अरुणेश कुमार केस की गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन करने का आदेश देते हुए याची को राहत दी है।
याची के खिलाफ 3 जुलाई 24 को महराजगंज धाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। कोर्ट ने एफआईआर रद करने से इंकार कर दिया।
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