आगरा २१ मई ।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, न्यायालय संख्या 1 माननीय विनीता सिंह आगरा ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए थाना खंदौली पुलिस को अनुज प्रताप सिंह द्वारा दर्ज कराए गए मामले में अज्ञात और ज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। यह आदेश 17 मई, 2025 को प्रकीर्ण प्रार्थनापत्र संख्या-4830/2025 (अनुज प्रताप सिंह बनाम बीना देवी आदि) पर सुनवाई के बाद पारित किया गया।
मामला क्या है ?
प्रार्थी अनुज प्रताप सिंह ने अदालत में एक प्रार्थनापत्र (धारा 173 (4) बी.एन.एस.एस. के तहत) प्रस्तुत किया था, जिसमें उन्होंने बताया कि उनके पिता और उनके तीन चाचा हैं। उनकी दादी श्रीमती विमला देवी ने 28 नवंबर, 2024 को एक प्लाट अपने तीन पुत्रों को मालिकाना हक में दिया था। इस प्लाट पर प्रार्थी के चाचा राजेंद्र सिंह, चाची बीना देवी और उनके तीन बच्चे कथित तौर पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे।
प्रार्थी के अनुसार, 5 जनवरी, 2025 को सुबह करीब 9 बजे, उन्हें सूचना मिली कि उनके चाचा राजेंद्र सिंह, चाची बीना देवी और दो अन्य व्यक्ति उनके प्लाट पर अवैध निर्माण कर रहे हैं। जब प्रार्थी और उनके परिवार के सदस्य वहां पहुंचे और उन्हें रोकने की कोशिश की, तो उन लोगों ने गाली-गलौज की और लाठी-डंडों, हॉकी और फरसा जैसे हथियारों से उन पर हमला कर दिया। इस मारपीट में प्रार्थी का सिर फट गया और वे बेहोश हो गए।
प्रार्थी के दूसरे चाचा अजय ने पुलिस को बुलाया और घटना के बारे में बताया। पुलिस सभी संबंधित व्यक्तियों को थाने ले गई, जहाँ प्रार्थी ने लिखित तहरीर दी और उनका मेडिकल भी कराया गया। हालांकि, पुलिस ने विपक्षीगण के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली, लेकिन प्रार्थी की शिकायत दर्ज नहीं की गई। प्रार्थी ने 8 जनवरी, 2025 को व्यक्तिगत रूप से पुलिस आयुक्त, आगरा को भी प्रार्थनापत्र दिया, लेकिन उनकी रिपोर्ट फिर भी दर्ज नहीं की गई। प्रार्थी ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षीगण उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।
कोर्ट की कार्यवाही और निष्कर्ष
न्यायालय ने प्रार्थी के अधिवक्ता नरेश कुमार को सुना और पत्रावली तथा थाना रिपोर्ट का अवलोकन किया। न्यायालय ने पाया कि प्रार्थी ने अपने प्रार्थनापत्र के समर्थन में अपना शपथपत्र, थाना और पुलिस आयुक्त आगरा को दिए गए प्रार्थनापत्र की फोटोकॉपी जैसे दस्तावेज भी दाखिल किए हैं।
थाना खंदौली से प्राप्त जांच रिपोर्ट के अनुसार, जमीन विवाद को लेकर झगड़ा हुआ था, जिसमें प्रार्थी पक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है। प्रार्थी के प्रार्थनापत्र पर पुलिस आयुक्त पश्चिमी ने वरिष्ठ उपनिरीक्षक अंकुश कुमार, थाना सैया, कमिश्नरेट आगरा को जांच के लिए नामित किया था।
हालांकि, वरिष्ठ उपनिरीक्षक अंकुश कुमार ने एफआईआर दर्ज करने के लिए पर्याप्त सबूत या आधार नहीं पाए और एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश नहीं की।
न्यायालय ने इस बात पर गौर किया कि दोनों पक्षों के बीच कथित घटना हुई थी, जिसमें विपक्षीगण के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, लेकिन प्रार्थी का मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
न्यायालय का आदेश
उपरोक्त तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर, न्यायालय ने पाया कि विपक्षीगण द्वारा प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध किया जाना प्रतीत होता है। इसलिए, न्यायालय ने अनुज प्रताप सिंह द्वारा प्रस्तुत प्रार्थनापत्र धारा 173 (4) बी.एन.एस.एस. के तहत स्वीकार कर लिया।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय विनीता सिंह ने संबंधित थानाध्यक्ष को आदेश दिया कि वे प्रार्थी का मुकदमा ज्ञात और अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ उचित धाराओं में दर्ज करें और नियमानुसार विवेचना सुनिश्चित करें।
हालांकि, न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि अभियुक्तों को बिना किसी ठोस सबूत के गिरफ्तार न किया जाए, और यदि मामला असत्य पाया जाता है, तो आवेदक के खिलाफ भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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