आगरा।
जनपद के थाना कागारौल क्षेत्र के अंतर्गत 13 वर्ष पूर्व नाली के विवाद में खूनी संघर्ष करने वाले चार आरोपियों को अदालत ने दोषी पाया है।
हालांकि, एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम माननीय यशवंत कुमार सरोज ने आरोपियों के भविष्य और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें जेल की सजा न देकर 6 माह की परिवीक्षा (Probation) पर रिहा करने का आदेश दिया है।
क्या है ‘परिवीक्षा’ की शर्त ?
अदालत ने स्पष्ट किया है कि रिहा किए गए चारों आरोपी दिलीप, जयवीर, राजू और मनीष अगले 6 महीने तक समाज में शांति और सदव्यवहार बनाए रखेंगे।
यदि इस अवधि के दौरान वे किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि में लिप्त पाए जाते हैं या शर्त का उल्लंघन करते हैं, तो उन्हें दंड के प्रश्न पर पुनः सुनवाई का सामना करना होगा और जेल जाना पड़ेगा।
पूरा मामला: 2012 का नाली विवाद:
घटना 19 मई 2012 की है। नगला कुँवर सेन निवासी वादी राम गोपाल ने आरोप लगाया था कि:
* आरोपियों ने जबरन गांव की नाली का पानी रोक दिया था, जिससे रास्ते में कीचड़ और गंदगी जमा हो गई थी।

* जब राम गोपाल ने इसकी शिकायत तहसील और थाने में की, तो आरोपी आगबबूला हो गए।
* रंजिश के चलते आरोपियों ने रात के समय वादी के भाई धर्मपाल और भतीजे करनपाल पर लाठी, डंडे और फरसे (धारदार हथियार) से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया था।
अदालत की कार्यवाही:
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से वादी सहित कुल 8 गवाह पेश किए गए। गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने चारों को गाली-गलौज, मारपीट और घातक चोट पहुंचाने का दोषी पाया।
लेकिन सुधारवादी न्याय प्रणाली को अपनाते हुए, कोर्ट ने उन्हें जेल भेजने के बजाय सुधरने का एक मौका देते हुए परिवीक्षा पर रिहा किया है।
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