आगरा:
धोखाधड़ी और चोरी के वाहन बरामदगी के एक पुराने मामले में, आरोपी वकील और रहीस को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है।
विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय अचल प्रताप सिंह ने घटना के करीब 16 वर्ष बाद यह फैसला सुनाया।
क्या था मामला ?
थाना न्यू आगरा में दर्ज इस मामले के अनुसार:
* घटना तिथि: 7 सितंबर, 2009 को वादी मुकदमा एस.एस.आई. महावीर सिंह अपने अधीनस्थों के साथ भगवान टॉकीज चौराहे पर वाहन चेकिंग कर रहे थे।
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* गिरफ्तारी और बरामदगी: मुखबिर की सूचना पर पुलिस दल ने घेराबंदी कर मौके से आरोपी वकील पुत्र नूरी तेली (निवासी नई आबादी, मलपुरा) और रहीस पुत्र मुन्ना तेली (निवासी मोहल्ला आजम पाड़ा, शाहगंज) को चोरी की मोटरसाइकिल संख्या UP-80-5362 के साथ गिरफ्तार किया।
* आगे की बरामदगी: आरोपियों की निशानदेही पर चोरी की दो अन्य मोटरसाइकिलें भी बरामद की गईं थीं।
पुलिस ने धोखाधड़ी और बरामदगी के आरोप में दोनों के विरुद्ध आरोप पत्र (चार्जशीट) प्रेषित किया, और अदालत ने 21 नवंबर, 2009 को उनके विरुद्ध आरोप तय किए थे।
अभियोजन की कमजोर कड़ी:
अदालत में मुकदमे के विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से भारी लापरवाही सामने आई।
* एकमात्र गवाह: अभियोजन पक्ष ने गवाही के लिए केवल थाने के मुंशी वेद प्रकाश नामक पुलिसकर्मी को ही पेश किया, जिसने वादी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया था। मुंशी का घटना या आरोपियों की गिरफ्तारी से सीधा कोई संबंध नहीं था।

* अन्य गवाह अनुपस्थित: वादी मुकदमा, विवेचक (इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर) और अन्य महत्वपूर्ण गवाहों को बयान के लिए अदालत द्वारा अनेक अवसर दिए गए, परंतु कोई भी गवाह अदालत में उपस्थित नहीं हुआ।
अदालत का फैसला:
विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय अचल प्रताप सिंह ने अभियोजन पक्ष को साक्ष्य पेश करने का अवसर समाप्त करते हुए, आरोपियों के अधिवक्ता राकेश शर्मा और शुभम झा के तर्कों को स्वीकार किया।
महत्वपूर्ण साक्ष्य और मुख्य गवाहों की अनुपस्थिति के कारण साक्ष्य के अभाव में, अदालत ने दोनों आरोपियों को घटना के 16 वर्ष बाद बरी करने का आदेश दिया।
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