आगरा।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सप्तम) माननीय अनुज कुमार सिंह की अदालत ने वर्ष 1999 में थाना सदर में दर्ज एनडीपीएस (मादक पदार्थ अधिनियम) के एक मामले में आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
इस मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आई है, जहां लगभग एक दर्जन पुलिसकर्मी गवाह होने के बावजूद दशकों तक एक भी गवाह अदालत में गवाही देने उपस्थित नहीं हुआ।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, तत्कालीन उपनिरीक्षक आर.के. सिसौदिया ने थाना सदर में मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया था कि 23 अगस्त 1999 को वह उपनिरीक्षक पी.एन. राय और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ चेकिंग कर रहे थे।
मुखबिर की सूचना पर थाना सदर पुलिस और एसओजी के उपनिरीक्षक संजीव कटियार व अन्य पुलिसकर्मियों की संयुक्त टीम ने राजपुर चुंगी के पास स्थित भांग के ठेके पर दबिश दी थी।
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पुलिस ने मौके से आरोपी मुन्ना (पुत्र नत्थी लाल, निवासी बरौली अहीर, थाना ताजगंज) सहित अन्य को अवैध चरस बेचते हुए हिरासत में लिया था।
पुलिस ने आरोपी मुन्ना के पास से 19 पुड़िया अवैध चरस बरामद करने का दावा करते हुए धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
इस मुकदमे में थाना सदर पुलिस और एसओजी के कई उपनिरीक्षक व पुलिसकर्मी गवाह थे।
न्यायालय द्वारा कई बार प्रतिकूल आदेश पारित किए जाने के बावजूद अभियोजन पक्ष की ओर से एक भी गवाह गवाही देने के लिए अदालत में पेश नहीं हुआ।
यह मामला न्यायालय के प्राचीनतम वादों की श्रेणी में शामिल था, जिसके कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मुकदमे के शीघ्र निस्तारण के लिए विशेष मॉनिटरिंग की जा रही थी।
गवाहों के उपस्थित न होने पर अदालत ने 10 दिसंबर 2025 को अभियोजन पक्ष के साक्ष्य पेश करने का अवसर समाप्त कर दिया था।
सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता अरुण तेहरिया ने अपने तर्क प्रस्तुत करते हुए साक्ष्यों के पूर्ण अभाव की बात न्यायालय के समक्ष रखी।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सप्तम) माननीय अनुज कुमार सिंह ने बचाव पक्ष की दलीलों से सहमति जताते हुए और पुलिस साक्ष्यों के पूर्णतया अभाव में आरोपी मुन्ना को दोषमुक्त करते हुए बरी करने के आदेश दिए।
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