आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी करते हुए दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण परियोजना से प्रभावित पक्ष को बड़ी राहत दी है।
कोर्ट ने विवादित संपत्तियों के प्रस्तावित ध्वस्तीकरण (Demolition) पर अगली सुनवाई तक पूरी तरह से रोक लगा दी है।
न्यायालय का मुख्य आदेश:
जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि विवादित स्थल पर अगली सुनवाई तक यथास्थिति (Status Quo)बनाए रखी जाए।
माननीय पीठ ने स्पष्ट किया कि इस अवधि के दौरान नगर निगम या प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
क्या है पूरा मामला ?

नगर निगम का नोटिस: प्रयागराज नगर निगम द्वारा 26 मई 2026 को दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण के दायरे में आने वाले भवनों को हटाने/गिराने के लिए एक नोटिस जारी किया गया था।
याचिकाकर्ताओं की दलील: प्रभावित पक्ष ने नगर निगम के इस नोटिस को वैधानिक आधारों पर चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी।
फौरी राहत: अदालत ने मामले की गंभीरता और प्रभावित पक्ष के अधिकारों को देखते हुए नगर निगम की त्वरित कार्रवाई पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है।
हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद अब नगर निगम अगली सुनवाई और कोर्ट के अंतिम फैसले तक चौड़ीकरण के नाम पर कोई भी दंडात्मक या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं कर सकेगा।
प्रभावित निवासियों के लिए यह एक बड़ी कानूनी राहत है
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