आगरा/प्रयागराज ।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में घायल अधिवक्ता जागृति शुक्ला की इलाज के दौरान हुई मौत के मामले में एक बड़ा और महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।
अदालत ने इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए रिटायर्ड न्यायमूर्ति अरुण टंडन की अध्यक्षता में एक न्यायिक जांच का आदेश दिया है।
इसके साथ ही कोर्ट ने डॉक्टरों और वकीलों, दोनों पक्षों से शांति व्यवस्था बनाए रखने और काम पर लौटने की अपील की है।
यह आदेश जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की डिवीजन बेंच ने मामले से जुड़ी दो अलग-अलग जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए पारित किया।
कोर्ट की कार्यवाही और प्रमुख निर्देश:
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने दो चरणों में सुनवाई की। लंच से पहले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष प्रोग्रेस रिपोर्ट और केस डायरी पेश की गई।

इस दौरान अधिवक्ताओं की ओर से तीन रिटायर्ड जजों के नाम का सुझाव दिया गया, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।
इसके बाद दोपहर दो बजे दोबारा सुनवाई शुरू हुई, जिसमें अदालत ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए:
न्यायिक जांच का गठन: पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच कराने के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अरुण टंडन की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है।
डॉक्टरों को काम पर लौटने का निर्देश: कोर्ट ने आंदोलनरत डॉक्टरों को तुरंत हड़ताल खत्म करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही डॉक्टरों को राहत देते हुए कहा कि फिलहाल उनकी गिरफ्तारी नहीं होगी।
वकीलों के लिए हिदायत: कोर्ट ने अधिवक्ताओं को भी किसी भी प्रकार की हड़ताल, प्रदर्शन या चक्का जाम न करने को कहा है, ताकि आम जनता और न्यायिक कार्य प्रभावित न हों।
अगली सुनवाई: इस मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 27 जुलाई की तिथि निर्धारित की है।
दो अलग-अलग जनहित याचिकाओं पर हुई सुनवाई:
इस पूरे मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनकी कोर्ट एक साथ सुनवाई कर रहा है:
सिविल जनहित याचिका अधिवक्ता ममता सिंह और अन्य महिला अधिवक्ताओं की ओर से दाखिल की गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सड़क हादसे के 18 दिन बाद अधिवक्ता जागृति शुक्ला की मौत हुई, लेकिन इस दौरान विवेचना अधिकारी या मजिस्ट्रेट ने उनके बयान तक दर्ज नहीं किए।
महिला अधिवक्ताओं ने मांग की है कि पूरी जांच हाईकोर्ट की निगरानी में हो और एस आर एन अस्पताल में हुई मारपीट के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा जाए।
दूसरी क्रिमिनल जनहित याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के महामंत्री अखिलेश शर्मा और उपाध्यक्ष अमित सिंह सोनू की ओर से दाखिल की गई है।
इस याचिका में भी घटना की निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है।
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