आगरा।
अस्पताल के कर्मचारियों से गाली-गलौज, मारपीट और तोड़फोड़ करने के मामले में नामजद आरोपी हेमंत उर्फ महेंद्र, निवासी शाहगंज, आगरा को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय शिवानन्द गुप्ता ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी को दोषमुक्त करने के आदेश जारी किए।
मामले के अनुसार, शाहगंज थाने में दर्ज कराए गए मुकदमे में वादी गजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया था कि 14 फरवरी 2016 की दोपहर करीब 12 बजे आरोपी हेमंत उर्फ महेंद्र 20-25 अन्य लोगों के साथ एक बेहोश लड़की को लेकर नवनीत हॉस्पिटल आया था।
आरोपी ने अस्पताल स्टाफ से डॉक्टर को तुरंत बुलाकर इलाज शुरू करने को कहा और बताया कि लड़की ने जहर खा लिया है।
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जब अस्पताल प्रशासन ने औपचारिकताएं पूरी करने और जहर का मामला होने के कारण शाहगंज थाना पुलिस को सूचना देने की बात कही, तो आरोपी और उसके साथ आए लोग भड़क गए।
आरोप था कि उन्होंने वादी तथा अन्य स्टाफ के साथ गाली-गलौज और मारपीट की, साथ ही अस्पताल में तोड़फोड़ भी की।
पुलिस ने तफ्तीश पूरी करने के बाद अदालत में केवल हेमंत उर्फ महेंद्र के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल की थी।
न्यायालय में मुकदमे के विचारण (ट्रायल) के दौरान अभियोजन की ओर से वादी मुकदमा गजेंद्र सिंह और श्याम वीर सिंह की गवाही दर्ज कराई गई।
हालांकि, सुनवाई के दौरान ये दोनों ही मुख्य गवाह अपने पिछले बयानों से मुकर गए और उन्होंने घटना का समर्थन नहीं किया।
अदालत में आरोपी के अधिवक्ता लीडर वर्मा ने दलीलें पेश कीं।
मुख्य गवाहों के मुकर जाने और अभियोजन पक्ष द्वारा आरोप साबित करने के लिए कोई पुख्ता सबूत न पेश कर पाने के कारण, विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय शिवानन्द गुप्ता ने आरोपी हेमंत को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया।
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