मर्जी से गई युवती के मामले में आरोपी को मिली जमानत, अदालत ने माना कि जबरदस्ती ले जाने का कोई साक्ष्य नहीं

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा।

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले की सत्र अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में युवती को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के आरोपी को सशर्त जमानत दे दी है।

सत्र न्यायाधीश माननीय संजय कुमार मलिक ने मामले की परिस्थितियों और पीड़िता के बयानों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया।

केस के मुख्य बिंदु:

पीड़िता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत दर्ज कराए गए अपने बयानों में स्पष्ट किया कि वह अपनी मर्जी से बिना किसी को बताए घर से निकली थी।

उसने आरोपी के साथ अपनी इच्छा से जाने की बात स्वीकार की और बताया कि उसके साथ कोई गलत काम या जोर-जबरदस्ती नहीं हुई है।

यद्यपि प्राथमिकी में युवती की उम्र कम बताई गई थी, लेकिन मुख्य चिकित्साधिकारी आगरा द्वारा किए गए परीक्षण में उसकी आयु लगभग 18 वर्ष पाई गई है।

अभियोजन पक्ष आरोपी की किसी अन्य आपराधिक पृष्ठभूमि को साबित करने में असमर्थ रहा, और आरोपी करीब एक महीने से जेल में निरुद्ध था।

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अदालत का निष्कर्ष और निर्देश:

अदालत ने केस डायरी और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत मौजूद नहीं है जिससे यह साबित हो कि आरोपी ललित प्रजापति ने पीड़िता को डरा-धमकाकर या जबरन अपने साथ रखा था। इसके विपरीत, युवती का पूरा आचरण उसकी अपनी इच्छा को दर्शाता है।

तथ्यों और परिस्थितियों को उचित मानते हुए न्यायालय ने आरोपी का जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया।

अदालत ने आदेश दिया कि आरोपी को पचास हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि की दो प्रतिभूतियां दाखिल करने पर रिहा किया जाए।

इसके साथ ही आरोपी पर यह शर्तें भी लागू की गई हैं कि वह किसी अन्य अपराध में संलिप्त नहीं होगा, गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा और विचारण प्रक्रिया में पूरा सहयोग प्रदान करेगा।आरोपी के पैरवी अधिवक्ता संदीप सिंह द्वारा की गई ।

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विवेक कुमार जैन
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