आगरा ।
विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत के विरुद्ध किसानों के अपमान और राजद्रोह से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान एक अप्रत्याशित स्थिति उत्पन्न हुई।
न्यायाधीश माननीय अनुज कुमार सिंह की अदालत में कंगना रनौत की अधिवक्ता को न्यायालय की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले प्रार्थना पत्र के कारण कई बार क्षमा याचना करनी पड़ी।
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, कंगना रनौत की अधिवक्ता सुधा प्रधान ने 21 अप्रैल 2026 को एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। इसमें दावा किया गया था कि अदालत ने पूर्व में विपक्षी पक्ष को अनुचित लाभ दिया और 16 अप्रैल को निर्णय की तिथि नियत होने के बावजूद फैसला नहीं सुनाया।
इसके साथ ही प्रार्थना पत्र में 30 अप्रैल को निर्णय पारित न करने और नए दस्तावेज पेश करने के लिए समय की मांग की गई थी।
इस पर वादी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालय की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही है।

16 अप्रैल को केवल पत्रावली में सुविधा के लिए फ्लैग लगाए गए थे, न कि कोई नई बहस हुई थी। उन्होंने न्यायालय पर लगाए गए इन आरोपों को अनर्गल बताते हुए प्रतिवादी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की मांग की।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कंगना रनौत की अधिवक्ता से कड़े सवाल पूछे। अदालत ने जानकारी चाही कि 3 अप्रैल को प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की प्रति वादी पक्ष को क्यों नहीं दी गई, जबकि इसके लिए स्पष्ट आदेश दिए गए थे।
साथ ही, न्यायालय ने उस दावे पर भी स्पष्टीकरण मांगा जिसमें 16 अप्रैल को निर्णय के लिए तिथि नियत होने की बात कही गई थी, जबकि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं था।
अपनी गलती स्वीकार करते हुए और लिखित आरोपों पर स्पष्टीकरण न होने की स्थिति में कंगना रनौत की अधिवक्ता ने हाथ जोड़कर न्यायालय से बार-बार माफी मांगी।
अदालत ने इस स्थिति पर संज्ञान लेते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 मई 2026 की तिथि निर्धारित की है। साथ ही प्रतिवादी पक्ष को कुछ आवश्यक प्रपत्र प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर प्रदान किया गया है।
इस कानूनी प्रक्रिया में वादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान, राजवीर सिंह, आईडी श्रीवास्तव, कुमारी प्रीति और बी एस फौजदार ने पक्ष रखा, जबकि कंगना रनौत की ओर से सुप्रीम कोर्ट की जूनियर अधिवक्ता सुधा प्रधान ने बहस की।
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