डबल मर्डर केस: आगरा कोर्ट ने पति, ससुर और देवर को सुनाई फांसी की सजा

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आगरा:

जनपद के बहुचर्चित सुशील नगर (एत्माद्दौला) दोहरे हत्याकांड में अपर जिला जज (न्यायालय संख्या-26) माननीय अमरजीत की अदालत ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

कोर्ट ने मृतका के पति, देवर और ससुर को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (विरलतम से विरल) मामला मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है।

अदालत ने दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जबकि मृतका की सास को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।

घटना का संक्षिप्त विवरण:

यह मामला 27 मई 2022 का है। एत्माद्दौला थाना क्षेत्र के सुशील नगर में पूजा (28) और उसके मौसेरे देवर शिवम (21) की लाठी-डंडों और धारदार हथियार (बांका) से बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।

पूजा की शादी 6 साल पहले गौरव से हुई थी, लेकिन ससुराल पक्ष लगातार दहेज में कार और 5 लाख रुपये की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित कर रहा था। शिवम, जो पूजा की मदद करता था, उसे षड्यंत्र के तहत घर बुलाकर मौत के घाट उतार दिया गया था।

न्यायालय का कड़ा रुख:

 “तब तक लटकाएं जब तक मृत्यु न हो जाए”:

अभियोजन पक्ष ने दोषियों के खिलाफ कड़े साक्ष्य पेश किए। माननीय न्यायाधीश ने सजा सुनाते हुए स्पष्ट आदेश दिया कि:

“दोषियों (गौरव, अभिषेक और मदन) को तब तक गर्दन के सहारे फांसी पर लटकाया जाए, जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए।”

सजा दिलाने में अहम रहे ये साक्ष्य:

इस मामले में पुलिस और अभियोजन पक्ष की मुस्तैदी के कारण आरोपियों को सजा तक पहुँचाया जा सका।

सजा के मुख्य आधार निम्नलिखित रहे:

* सीसीटीवी फुटेज: पूरी वारदात पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी, जो वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में निर्णायक साबित हुई।

* चश्मदीद गवाही: मृतक शिवम के भाई अभिषेक की गवाही ने अभियोजन के पक्ष को मजबूती प्रदान की।

* त्वरित जांच: पुलिस ने घटना के मात्र 3 महीने के भीतर (23 अगस्त 2022) हत्या का आरोपपत्र दाखिल कर दिया था।

केस टाइमलाइन: एफआईआर से फांसी तक:

* 27 मई 2022: पूजा और शिवम की नृशंस हत्या और प्राथमिकी दर्ज।

* 23 अगस्त 2022: हत्या की धाराओं में कोर्ट में चार्जशीट पेश।

* 17 अप्रैल 2023: मुकदमे का ट्रायल शुरू हुआ।

* 11 फरवरी 2026: दोषियों के बयान दर्ज किए गए।

* 1 अप्रैल 2026: कोर्ट ने तीनों मुख्य आरोपियों को मृत्युदंड सुनाया।

अदालत के इस फैसले से समाज में कड़ा संदेश गया है कि दहेज लोभ और जघन्य अपराधों के लिए न्याय प्रणाली में कोई स्थान नहीं है।

मृतका की माँ इंद्रा देवी द्वारा शुरू की गई कानूनी लड़ाई चार वर्ष बाद अपने मुकाम पर पहुँची है।

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विवेक कुमार जैन
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