आगरा:
विशेष न्यायाधीश (SC/ST एक्ट) माननीय शिव कुमार की अदालत ने हत्या, दलित उत्पीड़न और हत्या के प्रयास के एक गंभीर मामले में तीन सगे भाइयों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने दोषियों पर कुल 2 लाख 1 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
घटना का विवरण: साजिश और हमला
मामला थाना सिकंदरा के ग्राम जऊपुरा का है। वादी भीमसेन के अनुसार, 27 जुलाई 2017 की रात करीब 9 बजे उनका पुत्र राकेश, भाई नवाब सिंह और 3 वर्षीय पौत्री राखी, अस्पताल से घर लौट रहे थे।
रास्ते में पहले से घात लगाकर बैठे आरोपियों ने पुरानी रंजिश के चलते उन पर लाठी, डंडे, सरिया और तमंचों से हमला कर दिया।
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पुलिस को गुमराह करने की कोशिश:
घटना को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने बड़ी चालाकी से 100 नंबर पर पुलिस को सूचना दी कि उनके इलाके में ‘बदमाश’ आ गए हैं।
मौके पर पहुंची पुलिस ने गंभीर रूप से घायल राकेश और नवाब सिंह को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उपचार के दौरान नवाब सिंह की मृत्यु हो गई।
आरोपियों का उद्देश्य पीड़ितों पर दबाव बनाना था ताकि वे पुराने मुकदमों में गवाही न दें।
अदालत का फैसला:
विशेष न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों का अवलोकन करते हुए निम्नलिखित निर्णय दिया:
* दोषी: जग्गो उर्फ जगदीश, भोला उर्फ रामेश्वर और फूली उर्फ फूल सिंह (तीनों पुत्र देवी राम) को हत्या और दलित उत्पीड़न का दोषी पाया गया।
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* सजा: तीनों को आजीवन कारावास और ₹2,01,000/- के अर्थदंड से दंडित किया गया।
* बरी: साक्ष्य के अभाव में तीन अन्य आरोपियों (अशोक, लच्छो और रज्जो) को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया।
प्रमुख साक्ष्य और दलीलें:
वादी के अधिवक्ता रमेश चंद्रा और सुरेश चंद गौतम ने अदालत में जोरदार पैरवी की। मामले में वादी भीमसेन और घायल राकेश सहित कुल 13 गवाह पेश किए गए।
मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घायल के बयानों ने आरोपियों के खिलाफ अपराध सिद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि रंजिश के चलते किसी की जान लेना और फिर पुलिस को गुमराह करने के लिए झूठी सूचना देना समाज में कानून के इकबाल को चुनौती देना है।
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