बीमा क्लेम को ‘फर्जी’ बताकर खारिज करना सेवा में कमी: उपभोक्ता आयोग प्रथम आगरा ने बीमा कंपनियों पर लगाया भारी हर्जाना

उपभोक्ता मामले न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा:

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पर्याप्त चिकित्सा दस्तावेजों के बावजूद बीमा क्लेम को ‘फर्जी’ (Fraud) बताकर निरस्त करना सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार संव्यवहार (Unfair Trade Practice) है।

आयोग ने बीमा कंपनियों को आदेश दिया है कि वे परिवादी को स्वास्थ्य बीमा की राशि ब्याज सहित प्रदान करें और मानसिक पीड़ा के लिए हर्जाना भी भरें।

मामले की पृष्ठभूमि:

परिवादी संजीव कुमार जैन, जो भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के एजेंट हैं, ने अपनी कंपनी के माध्यम से द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी से स्वास्थ्य बीमा कराया था।

मार्च 2019 में एक दुर्घटना में घायल होने के बाद उन्होंने आगरा के मॉडर्न हॉस्पिटल में इलाज कराया, जिसका कुल खर्च ₹1,95,556/- आया। जब उन्होंने क्लेम के लिए आवेदन किया, तो बीमा कंपनियों ने अन्वेषक (Investigator) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए क्लेम यह कहकर खारिज कर दिया कि अस्पताल के रिकॉर्ड में मरीज का नाम दर्ज नहीं है और कागजात फर्जी तरीके से तैयार किए गए है।

आयोग का तर्क और निर्णय:

अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने पाया कि:

* दस्तावेजों का सत्यापन: परिवादी ने अस्पताल के बिल और डिस्चार्ज स्लिप प्रस्तुत किए थे, जो संबंधित डॉक्टर द्वारा सत्यापित थे और उन पर अस्पताल की मुहर लगी थी।

* सबूतों का अभाव: बीमा कंपनी ने जिस ‘इन्वेस्टिगेटर रिपोर्ट’ के आधार पर क्लेम खारिज किया, उसे आयोग के समक्ष साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत ही नहीं किया गया।

* सेवा में कमी: आयोग ने माना कि इलाज के वैध पर्चों और बिलों पर अविश्वास करने का कोई ठोस कारण मौजूद नहीं है।

आयोग का आदेश:

आयोग ने द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी और मेडी असिस्ट इंडिया टीपीए को संयुक्त रूप से निम्नलिखित भुगतान करने का आदेश दिया:

* बीमा राशि: ₹1,95,556/- परिवाद दायर करने की तिथि (22.10.2020) से 6% वार्षिक ब्याज के साथ।

* मानसिक क्षतिपूर्ति: ₹20,000/-

* वाद व्यय: ₹10,000/-

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो ब्याज की दर 6% से बढ़ाकर 9% वार्षिक कर दी जाएगी।

भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की भूमिका केवल प्रीमियम संग्राहक की होने के कारण उनके विरुद्ध वाद खारिज कर दिया गया।

Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp  – Group BulletinChannel Bulletin

विवेक कुमार जैन
Follow me

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *