आगरा:
जनपद के अपर सत्र न्यायाधीश (न्यायालय संख्या-1) माननीय पुष्कर उपाध्याय ने मोबाइल लूट/छीनने के आरोपी करन को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों और इस तथ्य को ध्यान में रखा कि आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि:
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी अजीत ने थाना खन्दौली में तहरीर दी थी कि 25 नवंबर 2025 को जब वह ऑटो से टेडी बगिया जा रहा था, तब मोटरसाइकिल सवार दो अज्ञात युवकों ने झपट्टा मारकर उसका ‘इनफिनिक्स’ कंपनी का मोबाइल छीन लिया था।
पुलिस ने विवेचना के दौरान आरोपी करन और एक अन्य को गिरफ्तार किया और उनके पास से छीना हुआ मोबाइल बरामद करने का दावा किया।
बचाव पक्ष के तर्क:
आरोपी के अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी कि:
* प्रार्थी निर्दोष है और उसे रंजिशन झूठा फंसाया गया है ।
* वह प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) में नामजद नहीं था ।
* कथित गिरफ्तारी और बरामदगी सार्वजनिक स्थान से दिखाई गई है, लेकिन इसका कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं है ।
* आरोपी 6 दिसंबर 2025 से जेल में निरुद्ध है ।

न्यायालय का निर्णय:
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि आरोपी का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड अभियोजन द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया है।
साथ ही, कोर्ट ने टिप्पणी की कि अभियुक्त द्वारा किया गया कथित अपराध मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय (triable by Magistrate) है।
जमानत की शर्तें:
अपर सत्र न्यायाधीश ने करन की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए उसे ₹50,000/- के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि की दो प्रतिभूतियां दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने कुछ शर्तें भी लागू की हैं:
* आरोपी विवेचना और विचारण में पूरा सहयोग करेगा।
* वह साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा और गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा।
* वह समान प्रकृति के अपराध की पुनरावृत्ति नहीं करेगा।
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