‘अस्थायी ऑक्युपेन्सी सर्टिफिकेट’ के आधार पर बिल्डर नहीं दे सकता पजेशन
रेरा ट्रिब्यूनल ने बिल्डर ‘स्ट्रेटेजिक डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड’ को दिए खरीददार को ब्याज सहित रिफंड किए जाने के आदेश
आगरा/लखनऊ:
उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण (U.P. REAT) ने घर खरीदारों के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि कोई भी बिल्डर या प्रमोटर केवल ‘अस्थायी ऑक्युपेन्सी सर्टिफिकेट’ (Temporary Occupation Certificate) के आधार पर फ्लैट का पजेशन ऑफर नहीं कर सकता।
ट्रिब्यूनल ने गौतमबुद्ध नगर के एक मामले में ‘स्ट्रेटेजिक डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड’ को आदेश दिया है कि वह खरीददार की पूरी जमा राशि ब्याज सहित वापस करे।
जानिये क्या था पूरा मामला ?
विजेंद्र सिंह राघव (अपीलकर्ता) ने ग्रेटर नोएडा (वेस्ट) के सेक्टर-16 स्थित ‘रॉयल कोर्ट’ प्रोजेक्ट में 13 सितंबर 2013 को एक फ्लैट बुक किया था। फ्लैट की कुल कीमत ₹55.82 लाख थी, जिसमें से राघव ने ₹20,96,239/- जमा कर दिए थे। अनुबंध के अनुसार, पजेशन मार्च 2017 तक मिल जाना चाहिए था, लेकिन प्रोजेक्ट में देरी हुई।

जब मामला यूपी रेरा (RERA) के पास पहुंचा, तो रेरा ने 28 जनवरी 2020 को आदेश दिया कि खरीदार फ्लैट का पजेशन ले ले, क्योंकि बिल्डर को अस्थायी ऑक्युपेन्सी सर्टिफिकेट मिल चुका था। खरीददार ने इस फैसले को अपीलीय ट्रिब्यूनल में चुनौती दी, क्योंकि उन्होंने पजेशन के बजाय रिफंड की मांग की थी।
ट्रिब्यूनल के फैसले की मुख्य बातें:
1. अपनी मर्जी से राहत नहीं दे सकता रेरा:
ट्रिब्यूनल के चेयरमैन जस्टिस सुनीत कुमार और प्रशासनिक सदस्य रामेश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि रेरा अथॉरिटी अपनी मर्जी से वह राहत नहीं दे सकती जो खरीददार ने मांगी ही न हो। खरीददार ने रिफंड मांगा था, लेकिन अथॉरिटी ने पजेशन का आदेश दे दिया, जो कानूनी रूप से गलत था।
2. ‘अस्थायी’ प्रमाणपत्र वैध पजेशन का आधार नहीं:
अदालत ने स्पष्ट किया कि ‘अस्थायी ऑक्युपेन्सी सर्टिफिकेट’ (TOC) प्रोजेक्ट पूरा होने से पहले एक सीमित समय के लिए दिया जाता है। यह कानूनन ‘पूर्ण ऑक्युपेन्सी सर्टिफिकेट’ (OC) के बराबर नहीं है। जब तक बिल्डर के पास वैध OC न हो, तब तक पजेशन का प्रस्ताव कानूनी रूप से मान्य नहीं माना जाएगा।
3. खरीददार का पैसा वापस करने का आदेश:
ट्रिब्यूनल ने पाया कि जब खरीददार ने शिकायत दर्ज की थी, तब बिल्डर के पास स्थायी OC नहीं था। इसलिए, खरीददार को प्रोजेक्ट से हटने और अपना पैसा वापस पाने का पूरा हक है।
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अंतिम निर्णय:
ट्रिब्यूनल ने रेरा अथॉरिटी के पुराने आदेश को रद्द करते हुए प्रमोटर को निर्देश दिया है कि:
* खरीददार द्वारा जमा की गई ₹20,96,239/- की राशि को वापस किया जाए।
* इस राशि पर MCLR+1% की दर से ब्याज भी देना होगा।
* यह पूरा भुगतान आदेश जारी होने के 45 दिनों के भीतर करना अनिवार्य है।
अपीलकर्ता फ्लैट खरीददार बिजेंद्र सिंह राघव की तरफ़ से प्रभावी पैरवी दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता एस के शर्मा और अधिवक्ता अजय यादव ने की ।
Attachment/Order/Judgement – 1765352199
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