आरोपी पिता पुत्रों को दोषी पाने के बाद भी जेल की सजा नहीं मिली
आगरा ५ मई ।
घर में घुस मारपीट, बल्बा एवं अन्य धारा में आरोपित पिता लक्ष्मण सिंह पुत्र लोटन सिंह एवं उसके पुत्र गण मंगल सिंह एवं जय सिंह को दोषी पाने के बाद भी जेल की सजा ना देते हुए विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट ने 6 माह की परिवीक्षा पर रिहाई के आदेश दिये।
थाना मलपुरा में दर्ज मामले के अनुसार वादी मुकदमा सुरेश उर्फ सर्वेश निवासी नई बस्ती, अजीज पुर, थाना मलपुरा, जिला आगरा का आरोप था कि 26 जून 2012 की शाम 7 बजें करीब वह घर कें आंगन में भैंसों का दूध निकाल रहा था।
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उसी समय पड़ोस में रहने वाले आरोपी पिता पुत्रों एवं अन्य ने लाठी, डंडे, सरिया से लैस हो घर में घुस गाली गलौज देते हुये बगीचे से पानी लेने कारण जाति सूचक शब्द कहते हुये मारपीट की।
पत्नी द्वारा बचाने पर आरोपियों ने उसकीं गर्भवती पत्नी के साथ भी मारपीट की।घटना में वादी उसकी पत्नी के चुटैल होने के साथ साथ वादी पक्ष के रामबाबू के हाथ की हड्डी भी टूट गयी।
वादी की तहरीर पर दलित उत्पीड़न, घर में घुस मारपीट कर हड्डी तोड़ने बल्बा आदि धारा में मुकदमा दर्ज हुआ। अदालत ने मुकदमे के विचारण उपरांत आरोपी पिता पुत्रो के अधिवक्ता अशोक कुमार कुशवाह के तर्क पर आरोपियों को घर में घुस मारपीट कर हड्डी तोड़ने एवं बल्बे के आरोप में ही दोषी माना। अदालत नें आरोपियों को जेल की सजा ना दें 6 महीने की परिवीक्षा (नेक चाल चलनी)पर रिहा करने के आदेश दिये।
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