इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तथ्य आवेदक जानता है कह एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने से इंकार नहीं कर सकते मजिस्ट्रेट

उच्च न्यायालय मुख्य सुर्खियां
कंप्लेंट केस दर्ज करने का आदेश रद्द,नये सिरे से आदेश देने का निर्देश

आगरा / प्रयागराज 11 अक्टूबर।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तथ्यों की जानकारी आवेदक को है कहकर धारा 156(3) की अर्जी पर मजिस्ट्रेट एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने से इन्कार नहीं कर सकते।

Also Read – छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को राहत देने से किया इनकार।

कोर्ट ने अर्जी पर यांत्रिक तरीके से न्यायिक विवेक का इस्तेमाल करने के कारण मजिस्ट्रेट के कंप्लेंट केस दर्ज करने के आदेश को रद्द कर दिया और एक महीने में नियमानुसार नये सिरे से आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने चंदौली के मुकेश खरवार के याचिका पर दिया है।

याची का कहना था कि वह पपौरा विकास खंड चहनिया का निर्वाचित सदस्य है। 04 फरवरी 2024 को वे क्षेत्र पंचायत सदस्यों के साथ अरुण कुमार जयसवाल, ब्लॉक प्रमुख चहनिया के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय पर एकत्र हुए थे।

इससे नाराज होकर 14 फरवरी 2024 को गोपाल सिंह उर्फ बबलू और मोनू सिंह गांव पहुंचे और ब्लॉक प्रमुख के पक्ष में शपथ पत्र पर जबरन हस्ताक्षर कराना चाहा ।

Also Read – इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में अपंग हुई ढाई साल की बच्ची को 23 लाख 69 हजार मुआवजा देने का दिया निर्देश।

इन्कार करने पर गाली-गलौज, जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए मारपीट की, जबरन मोटरसाइकिल पर बैठा कर ले जाने की कोशिश की। शोर सुनकर पत्नी व अन्य ग्रामीण वहां पहुंचे और बीच-बचाव कर उसे बचाया।

यह भी आरोप लगाया कि उसने संबंधित पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कराने गया किन्तु भगा दिया गया। इसके बाद धारा 156(3)दंड प्रक्रिया संहिता के तहत अर्जी दायर की।

मजिस्ट्रेट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने के बजाय कंप्लेंट केस कायम कर लिया।

Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp  – Group BulletinChannel Bulletin
मनीष वर्मा
Follow Me

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *