आगरा।
नाबालिग के अपहरण और उसके साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के गंभीर मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है।
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट माननीय संगीता कुमारी की अदालत ने नाबालिग के अपहरण में सहयोग करने की आरोपी महिला की जमानत अर्जी को अपराध की गंभीरता को देखते हुए खारिज कर दिया है।
ताजगंज थाने में दर्ज मामले के विवरण के अनुसार, वादी की 17 वर्षीय नाबालिग बेटी 10 जनवरी 2025 की शाम करीब 6 बजे दवा लेने की बात कहकर घर से निकली थी।
काफी देर तक उसके वापस न लौटने पर परिजनों ने उसकी हर जगह तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी।
विवेचना और जांच के दौरान यह खौफनाक तथ्य सामने आया कि सह-आरोपियों ने वादी की पुत्री का अपहरण कर उसे बंधक बना लिया था और उसके साथ सामूहिक दुराचार की वारदात को अंजाम दिया था।
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इस जघन्य अपराध में सहयोग करने के आरोप में पुलिस ने 15 अगस्त 2026 को महिला आरोपी श्रीमती रुखसार उर्फ नेहा खान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
आरोपी महिला अमन की पत्नी है और मूल रूप से बद्दी वर्धमान चौराहा, हिमाचल प्रदेश की रहने वाली है, जबकि वर्तमान में वह आगरा के ताजगंज थाना क्षेत्र स्थित कोल्हाई में रह रही थी।
आरोपी महिला की ओर से अदालत में जमानत पर रिहा करने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था।
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट माननीय संगीता कुमारी ने मामले के सभी तथ्यों, अपराध की गंभीरता और नाबालिग के साथ हुए जघन्य कृत्य में अभियुक्ता की भूमिका पर विचार करते हुए रुखसार उर्फ नेहा खान का जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त करने के आदेश पारित किए।
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