आगरा/नई दिल्ली/मैनपुरी।
जनपद मैनपुरी के तालाबों और झीलों के संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) नई दिल्ली में अहम सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ता अजय प्रताप सिंह बनाम मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सरकार मामले (याचिका संख्या 121/2026) में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सिंचाई विभाग ने अपना-अपना पक्ष रखा, जबकि जिलाधिकारी मैनपुरी की ओर से जवाब देने के लिए और समय मांगा गया है।
इस पूरे मामले में एनजीटी ने अगली सुनवाई के लिए 4 जनवरी की तिथि निर्धारित की है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह के अनुसार, मामले में विपक्षी संख्या 6 और 9 यानी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अधिवक्ता प्रदीप मिश्रा और दलीप ध्यानी ने एनजीटी के समक्ष अपना जवाब प्रस्तुत किया। इस जवाब में जिले के कई ग्रामों के तालाबों के पानी की रिपोर्ट पेश की गई।

बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार थोरवा, चौपेरा, हरनागरपुर, नगला कमरिया, अस्योली, नारायणपुर, शिवपालपुर, अलीपुर पट्टी, चमर नगर, विक्रमपुर, नगला बन, अलीपुर खेड़ा, महमूदपुर, बर्धनिया, अजीतगंज, नगला जसी, धकपुरा, नगला सिंह, नगला पेंठ, देविदासपुर, अर्जुनपुर गढ़ी, अर्जुनपुर नगरिया, औंग, मालिखानपुर, नगला धुरा और अहिरवां ग्रामों के तालाबों का पानी जांच में प्रदूषित पाया गया है।
इसके साथ ही यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि मौजा अजीतगंज के गाटा संख्या 642 और 644 पर अतिक्रमण कर सड़क का निर्माण कर दिया गया है।
दूसरी तरफ, विपक्षी संख्या 3 (प्रमुख सचिव, सिंचाई विभाग) की ओर से अधिवक्ता प्रियंका स्वामी ने जवाब दाखिल करते हुए ट्रिब्यूनल को बताया कि याचिका में वर्णित तालाबों के संरक्षण का विषय राजस्व विभाग, वन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संबंधित है, इसका सिंचाई विभाग से सीधा कोई लेना-देना नहीं है।
वहीं, विपक्षी संख्या 7 (जिलाधिकारी मैनपुरी) की तरफ से जवाब दाखिल करने के लिए स्थगन प्रार्थना पत्र देकर समय की मांग की गई है। सभी पक्षों को सुनने के बाद अधिकरण ने मामले की अगली सुनवाई 4 जनवरी तय की है।
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