यमुना एक्सप्रेसवे बस हादसा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, स्लीपर बसों की सुरक्षा जांच के सख्त निर्देश

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आगरा/प्रयागराज।

ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर एक स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत की दुखद घटना पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेते हुए, न्यायालय ने प्रदेश में संचालित स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था और उनकी निगरानी को लेकर राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है।

न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए प्रमुख सचिव, पुलिस महानिदेशक और परिवहन विभाग के अपर मुख्य सचिव सहित संबंधित शीर्ष अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तलब किया।

न्यायालय ने अधिकारियों से हादसे के कारणों, दुर्घटना के बाद उठाए गए राहत व बचाव कदमों और प्रदेश में यात्री सुरक्षा के मौजूदा इंतजामों का ब्योरा मांगा।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने विभिन्न समाचार रिपोर्टों का भी संज्ञान लिया, जिनमें हादसे के वक्त यात्रियों के बीच मची अफरा-तफरी और कथित तौर पर मदद पहुंचने में हुई देरी का उल्लेख किया गया था।

इसके साथ ही, अदालत ने देश भर में पिछले तीन वर्षों के दौरान बसों में आग लगने की घटनाओं से जुड़े आंकड़ों पर भी गंभीरता से विचार किया।

हाईकोर्ट ने स्लीपर बसों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा है कि रात के समय संचालित होने वाली स्लीपर बसों का औचक और प्रभावी निरीक्षण किया जाना चाहिए।

बसों में अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन द्वारों और अन्य निर्धारित मानकों की जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई केवल बस के चालक या परिचालक तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए।

इस पूरी प्रक्रिया में बस संचालक और लाइसेंसधारी की जिम्मेदारी भी तय की जाए। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर बस का लाइसेंस रद्द करने या अन्य कठोर कानूनी कार्रवाई करने पर विचार किया जाना चाहिए।

मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को तय की गई है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई तक एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करे।

इस हलफनामे में पिछले तीन वर्षों में जारी किए गए स्लीपर बस परमिट, सुरक्षा जांच की स्थिति, बसों में किए गए अवैध मॉडिफिकेशन, व्यावसायिक पार्सलों के परिवहन, राज्य की सीमाओं पर चेकिंग की व्यवस्था और पूर्व में हुए हादसों के मामलों में अब तक की गई कार्रवाई की पूरी जानकारी अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

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मनीष वर्मा
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