आगरा।
थार सवार बदमाशों द्वारा यात्री से की गई लूट के एक मामले में विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) माननीय विकास गोयल की अदालत ने एक आरोपी का जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकृत करते हुए उसकी रिहाई के आदेश दिए हैं।
बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया था कि पुलिस से पूर्व में हुए विवाद के चलते आरोपी को रंजिशन इस झूठे मामले में फंसाया गया है।
थाना बमरौली कटारा में दर्ज एफआईआर के अनुसार, वादी सुधीश शर्मा ने शिकायत दी थी कि 25 जुलाई 2026 की रात वह आगरा के बिजली घर बस स्टैंड पर फतेहाबाद जाने के लिए वाहन का इंतजार कर रहा था।
इसी दौरान एक काले रंग की थार के चालक ने उसे फतेहाबाद छोड़ने का झांसा देकर गाड़ी में बैठा लिया। गाड़ी में पहले से ही कुछ लोग बैठे हुए थे।
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आरोप है कि बमरौली कटारा के पास एक सुनसान इलाके में कार रोककर उन लोगों ने वादी को डरा-धमकाकर उसका मोबाइल, अंगूठी और नगदी लूट ली और उसे गाड़ी से नीचे उतारकर भाग गए।
इस मामले में पुलिस ने जांच के दौरान सह-अभियुक्तों के कथित बयान के आधार पर थाना शमशाबाद क्षेत्र के ग्राम बिसेरी गोरबा निवासी 20 वर्षीय सूरज तोमर पुत्र प्रकाश को आरोपित बनाया।
पुलिस ने उसके पास से मात्र 12 रुपये की बरामदगी दिखाते हुए उसे 27 जुलाई 2026 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
अदालत में आरोपी की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अशोक कुमार कुशवाह ने पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने न्यायालय को बताया कि घटना से पहले आरोपी का पुलिस के साथ कुछ विवाद हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने उसे सबक सिखाने की धमकी दी थी।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि पुलिस ने अपनी इसी खुन्नस के चलते आरोपी को झूठा फंसाया है।
बचाव पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी को घटना स्थल से गिरफ्तार नहीं किया गया था और पुलिस ने उसके पास से जो बरामदगी दिखाई है, उसका कोई स्वतंत्र गवाह भी नहीं है।
असल में पुलिस ने आरोपी के खुद के पैसों को ही लूट की बरामदगी बता दिया। विशेष न्यायाधीश ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता के इन तर्कों को संज्ञान में लेते हुए आरोपी सूरज तोमर को जमानत पर रिहा करने का आदेश पारित किया।
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